
ग्वालियर। टीकमगढ़ (निवाड़ी) निवासी 42 वर्षीय मुकेश कुशवाह पिछले तीन साल से असहनीय दर्द और दो साल से पूरी तरह बिस्तर पर पड़े थे। एवस्कुलर नेक्रोसिस की बीमारी के साथ उनके दोनों कूल्हों के फीमोरल हेड में फ्रैक्चर भी हो गया था। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे निजी अस्पताल में इलाज नहीं करा पा रहे थे।
उम्मीद की आखिरी किरण लेकर मरीज न्यू जयारोग्य चिकित्सालय पहुंचा, जहां हड्डी रोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. सुरेंद्र सिंह यादव एवं उनकी टीम ने मरीज की जांच कर जटिल ऑपरेशन करने का निर्णय लिया। टीम ने मरीज के दोनों कूल्हों का सफल द्विपक्षीय हिप रिप्लेसमेंट किया।
ऑपरेशन के बाद मरीज अब पूरी तरह स्वस्थ है और अपने पैरों पर चलने लगा है। मरीज मुकेश कुशवाह ने बताया कि दर्द इतना अधिक था कि उसने जीने की उम्मीद तक छोड़ दी थी। इलाज के लिए पैसे भी नहीं थे। डॉक्टरों और अस्पताल की टीम ने उसके लिए भगवान जैसी मदद की और अब वह बिना सहारे चल पा रहा है।
स्टेरॉयड के अनियंत्रित इस्तेमाल से हुआ नुकसान
न्यूरो-ऑर्थोपेडिक विभाग के प्रोफेसर डॉ. सुरेंद्र सिंह यादव के अनुसार, एवस्कुलर नेक्रोसिस में जांघ की हड्डी के ऊपरी हिस्से में रक्त की आपूर्ति प्रभावित होने से हड्डी कमजोर होकर खराब होने लगती है। मुकेश के मामले में नेक्रोसिस के साथ फीमोरल हेड में फ्रैक्चर भी था।
डॉक्टरों के अनुसार, कूल्हे खराब होने के प्रमुख कारणों में स्टेरॉयड का अनियंत्रित सेवन, बिना चिकित्सकीय सलाह के स्टेरॉयड दवाओं का इस्तेमाल, बढ़ती उम्र के साथ स्टेरॉयड युक्त अप्रमाणित पाउडर का सेवन तथा अत्यधिक शराब का सेवन शामिल हो सकते हैं। ऐसे मामलों में समय पर चिकित्सकीय सलाह और उचित उपचार बेहद महत्वपूर्ण है।

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