दतिया मेडिकल कॉलेज के पूर्व डीन डॉ. राजेश गौर की मुश्किलें बढ़ीं, लोकायुक्त ने दर्ज की एफआईआर; आय से 7.43 करोड़ रुपये अधिक खर्च का आरोप

ग्वालियर-दतिया। मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के बीच दतिया मेडिकल कॉलेज के पूर्व डीन डॉ. राजेश गौर की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। लोकायुक्त संगठन ने आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की है। लोकायुक्त की प्रारंभिक जांच में उनकी ज्ञात आय और खर्च के बीच बड़ा अंतर सामने आने का दावा किया गया है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, लोकायुक्त की जांच में डॉ. राजेश गौर और उनके परिवार की कुल ज्ञात आय लगभग 2 करोड़ 31 लाख रुपये पाई गई, जबकि इस अवधि में करीब 9 करोड़ 74 लाख रुपये खर्च किए जाने की जानकारी सामने आई है। इस तरह ज्ञात आय से लगभग 7 करोड़ 43 लाख रुपये अधिक खर्च का मामला सामने आया है। जांच में यह खर्च ज्ञात आय की तुलना में करीब 321 प्रतिशत अधिक बताया गया है।
ग्वालियर, दतिया सहित कई स्थानों पर संपत्तियों की जांच
लोकायुक्त की प्रारंभिक जांच में डॉ. गौर और उनके परिवार के नाम पर आवासीय भूखंड, भवन, अन्य अचल संपत्तियों, बैंक ऋण और वित्तीय निवेश से संबंधित जानकारियां सामने आने की बात कही गई है। अब लोकायुक्त इन संपत्तियों की खरीद, निर्माण में हुए खर्च और आय के स्रोतों से जुड़े दस्तावेजों की विस्तृत जांच करेगा।
जांच का दायरा केवल दतिया तक सीमित नहीं है। ग्वालियर सहित अन्य स्थानों पर संपत्तियों के लेनदेन और निवेश की जानकारी भी जांच के दायरे में बताई जा रही है।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज
लोकायुक्त पुलिस ने प्रारंभिक जांच में प्राप्त आय-व्यय के रिकॉर्ड के आधार पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 13(1)(बी) एवं 13(2) के तहत मामला दर्ज किया है। अधिकारियों के अनुसार, अब संपत्तियों के दस्तावेज, बैंक लेनदेन, निवेश और आय के विभिन्न स्रोतों की पड़ताल की जाएगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि संपत्ति अर्जित करने के लिए धन कहां से आया।
पांच अन्य मामलों में भी उठे थे सवाल
डॉ. राजेश गौर के कार्यकाल से जुड़े मेडिकल कॉलेज के विभिन्न प्रशासनिक और वित्तीय मामलों को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। इनमें प्रमुख रूप से भवन निर्माण, नए ओपीडी ब्लॉक के निर्माण में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप, मेडिकल उपकरणों की करोड़ों रुपये की खरीद और भुगतान, शैक्षणिक पदों पर नियुक्तियों में अनियमितता, नर्सिंग भर्ती में आरक्षण रोस्टर की अनदेखी तथा आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती से जुड़े मामले शामिल हैं।
हालांकि, इन सभी मामलों में आरोपों और उनकी जांच की स्थिति अलग-अलग हो सकती है। इनकी वास्तविकता संबंधित दस्तावेजों और जांच के निष्कर्षों से ही स्पष्ट होगी।
जीआरएमसी से दतिया मेडिकल कॉलेज तक रहा प्रशासनिक सफर
डॉ. राजेश गौर ग्वालियर के गजराराजा मेडिकल कॉलेज (जीआरएमसी) में पैथोलॉजी विभाग के अध्यक्ष रह चुके हैं। इसके बाद दतिया मेडिकल कॉलेज की स्थापना और संचालन से जुड़ी प्रक्रियाओं में उनकी भूमिका रही। वर्ष 2014 से 2021 तक दतिया मेडिकल कॉलेज में पदस्थ रहते हुए उन्होंने कॉलेज के निर्माण और भर्ती संबंधी प्रक्रियाओं का काम संभाला।
इसके बाद वे रायपुर मेडिकल कॉलेज को शुरू कराने से जुड़ी गतिविधियों में भी भूमिका निभा चुके हैं। बाद के वर्षों में भोपाल सहित प्रदेश के दो निजी मेडिकल कॉलेजों में भी डीन के पद पर पदस्थ रहे।
अब संपत्तियों और निवेश के स्रोतों पर रहेगी नजर
लोकायुक्त द्वारा एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद अब जांच का अगला चरण महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जांच एजेंसी डॉ. गौर और उनके परिवार की संपत्तियों के दस्तावेजों, बैंक खातों, वित्तीय लेनदेन, निवेश और खर्च के रिकॉर्ड का मिलान करेगी। इसके साथ ही संपत्तियों के वास्तविक मूल्य और उनके अर्जित किए जाने के समय का भी परीक्षण किया जा सकता है।
फिलहाल मामला जांच के अधीन है। लोकायुक्त की विस्तृत जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई से ही यह स्पष्ट होगा कि आय से अधिक संपत्ति के आरोपों में कितनी सच्चाई है।

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