कैलारस शक्कर कारखाने की मशीनरी की नीलामी रद्द, क्षेत्रीय किसानों और किरार समाज ने की धन्यवाद सभा

ग्वालियर : अंचल की रीड की हड्डी कहे जाने वाला कैलारस शक्कर कारखाना बरसों से बंद पड़ा है । मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कई बार कैलारस और जौरा में चुनावों की सभा में जनता को आश्वासन दिलाया कि वे शक्कर कारखाने को पुनः चालू करवाएंगे । बंद पड़ी मशीनरी को नीलाम करने की योजना सरकार की ओर से बनाई गई तो मुख्यमंत्री ने मामले को संज्ञान में लिया , और एक प्रतिनिधि मंडल ने उनसे मुलाकात कर नीलामी रद्द करने की मांग की, जिसे मुख्यमंत्री ने गंभीरता से लिया और मशीनरी की नीलामी को विगत दिनों रद्द किया गया और नीलामी रद्द होने के बाद यह संभावना भी जताई जा रही है कि यह शक्कर कारखाना पुनः चालू हो सकता है ।
मशीनरी की नीलामी रद्द होने से क्षेत्र के किसानों में खुशी की लहर है, किसानों के चेहरों पर खुशियां दिख रही है, इसी अवसर पर किरार समाज और क्षेत्रीय किसानों के द्वारा गांधी रोड़ ग्वालियर स्थित किरार भवन पर एक धन्यवाद सभा का आयोजन किया गया जिसमें मुख्य रूप से कारखाने के पूर्व जीएम एमडी पाराशर सहित वह प्रतिनिधि मंडल भी उपस्थित रहा जिन्होंने मुख्यमंत्री से नीलामी को रद्द करने का आग्रह किया था।इसके अलावा बड़ी संख्या में क्षेत्रीय किसान भी उपस्थित जिन्होंने मुख्यमंत्री को धन्यवाद ज्ञापित किया । साथ ही धन्यवाद सभा में यह भी निर्णय हुआ कि वास्तविक तौर पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान धन्यवाद के पात्र हैं और आने वाले समय में कैलारस क्षेत्र में ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जी की एक विशाल धन्यवाद सभा का आयोजन किया जाएगा इसकी रूपरेखा शीघ्र ही तैयार की जाएगी ।
डॉ. सी पी शर्मा ने कहा कि जिस आग्रह के चलते थे नीलामी रद्द हुई है उसका सबसे अधिक श्रेय यदि जाता है तो दो व्यक्ति हैं पहले तो पूर्व जीएम एमडी पाराशर और जयारोग्य अस्पताल समूह के अधीक्षक डॉ. आर के एस धाकड़ ,इस नीलामी के रद्द होने के बाद कई इकाईयां यहां पुनर्जीवित हो सकेंगी ताकि क्षेत्रीय किसानों की आय में बढ़ोत्तरी होगी और साथ ही युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी प्राप्त होंगे ।
पूर्व जीएम पाराशर ने अपने वक्तव्य में कहा कि इस मामले का पूरा श्रेय मुख्यमंत्री को जाता है। फसल उत्पादन के अनुसार मार्केट के भाव तय होते हैं, जब भी गन्ने का भाव बढ़ता था तो उत्पादन भी बढ़ जाता था और बाजार में कीमत गिर जाने के कारण किसान इसका उत्पादन कम कर देते थे। फैक्ट्री में 400 काम करने वालों की आवश्यकता थी और उस समय करीब 1200 लोग काम कर रहे थे ,इसलिए आर्थिक स्थिति बिगड़ने के कारण फैक्ट्री बंद करनी पड़ी । मुख्यमंत्री को लेकर गलत धारणा फैलाई गई कि इसको बेचने में मुख्यमंत्री का हाथ है , जब कि मुख्यमंत्री जी इसको रद्द करने के पक्ष में थे और असलियत आपके सामने है । मुख्यमंत्री ने हमारी आग्रह की 1 घंटे में ही उन्होंने इस नीलामी को रद्द करने का निर्णय बदलकर किसानों के प्रति अपनी संवेदनशीलता को दिखा दिया कि वे इसको बेचने के नहीं बल्कि पुनः चालू करने के पक्षधर भी थे और प्रयासरत हैं । अब को नई इकाई शुरू हो गई वो पहले की तुलना में तीन गुनी क्षमता उत्पादन वाली होगी । एक शुगर फैक्ट्री से करीब छः प्रकार के उत्पादन तैयार होते हैं इससे यह तय है कि किसानों की चिंता करते हुए थे निर्णय मुख्यमंत्री ने लिया है वे वास्तविक तौर पर धन्यवाद के पात्र हैं।
डॉ. आर के एस धाकड़ ने मुख्यमंत्री को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि मैं किसान का बेटा हूं और किसान के दुःख दर्द और परिशानियों को बड़ी नजदीकी से देखा है । जिस प्रकार एक पेड़ अनेक प्रकार से अलग अलग लोगों को फायदा पहुंचाता है उसी प्रकार आने वाले समय में शक्कर कारखाना भी किसानों की आय तो बढ़ाएगा ही , युवाओं को रोजगार के अवसर भी प्रदान करेगा । तत्कालीन प्रबंधन के चलते कारखाने को बंद करना पड़ा जिसका खामियाजा क्षेत्रीय किसानों को खड़ी फसल में आग लगा कर भुगता,ये सब मैंने नजदीकी से अपने गांव घर में देखा । प्रतिनिधि मंडल ने जब मुख्यमंत्री जी से आग्रह किया तो उन्होंने स्वयं किसान पुत्र होने के नाते कारखाने की आवश्यकता को समझा और नीलामी को रद्द करने का निर्णय लिया इसलिए मुख्यमंत्री सिर्फ इस सांकेतिक धन्यवाद के नहीं अपितु इतनी बड़ी सौगात के लिए वृहद धन्यवाद ज्ञापित जाना चाहिए ।
कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर किया गया और उसके बाद अतिथियों का भी पुष्पहारों से स्वागत किया गया। मंच संचालन किराड़ संदेश पत्रिका के संपादक डॉ. परसराम राजपूत ने किया ।

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