कांग्रेस के अभेद किले , भाजपा इन पर फतेह पाने का देख रही है सपना

राजनीति : ग्वालियर चंबल अंचल की राजनीति शुरू से ही जनसंघ , जनता दल और भाजपा के इर्द गिर्द घूमी है , बावजूद इसके अंचल में कांग्रेस के कुछ ऐसे अभेद किले हैं जहां कांग्रेस अंगद के पैर की तरह जमी हुई है । इन अभेद किलों को ढहाने के लिए भाजपा ने सारे तौर तरीके अपना लिए , इनको ढहाने में न तो मोदी लहर काम आई और न ही भाजपा के शिवराज का तूफान…. । भाजपा ने कांग्रेस के इन अंगदों के पैर को हिलाने के लिए बड़े बड़े शूरवीरों और राजनीति के चाणक्यों को मैदान में उतारा लेकिन इन सब को मुंह की खानी पड़ी । अब इन किलों को ढहाने और इन पर अपनी विजय ध्वज लहराने की जिम्मेदारी भाजपा के चाणक्य कहे जाने वाले देश के गृहमंत्री अमित शाह ने संभाल ली है । इन सीटों को जीतने के लिए भाजपा में टिकट का चयन अब खुद गृहमंत्री अमित शाह करेंगे , भाजपा विकास के नाम जीतने का दावा कर रही है तो वहीं कांग्रेस का कहना है कि पिछली बार की तरह ही इस बार भी जनता उन्हें ही जिताएगी।
जानिए वे 5 किले जिन्हे भाजपा जीतने की ख्वाहिश पाले है
राघौगढ़ : यहां 1990 और 1993 में लक्ष्मण सिंह विधायक बने , 1998 और 2003 में दिग्विजय सिंह ने यहां से जीत दर्ज की थी और अब दिग्विजय सिंह के बेटे जयवर्धन सिंह विधायक हैं । दिग्गी और कांग्रेस के इस किले को भेदने के लिए भाजपा ने अपने तुरप के इक्के शिवराज सिंह चौहान को 2003 में मैदान में उतारा था लेकिन परिणाम निराशाजनक ही मिले ।
लहार : यह भी कांग्रेस का गढ़ है , यहां से कांग्रेस के डॉ गोविंद सिंह पिछले 30 सालों से अंगद की तरह पैर जमाकर बैठे हुए हैं और भाजपा इनके पैर को डिगा पाने में सफल नहीं हो पा रही है।
पिछोर : यहां कांग्रेस के के. पी. सिंह पिछले 30 सालों से कब्जा जमाए बैठे हैं, यहां जातिगत आधार पर भी भाजपा ने अपने मोहरे फिट करके देख लिए लेकिन कक्का के किले में सेंध नहीं लगा पाए । पूर्व सीएम उमा भारती के भतीजे को भी यहां हार का सामना करना पड़ा था।
भितरवार : यहां से कांग्रेस के लाखन सिंह लगातार तीन बार से विधायक हैं , लाखन सिंह ने भितरवार से पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के भांजे और भाजपा के कद्दावर नेता अनूप मिश्रा को लगातार दो बार शिसक्त दी है और अब भाजपा में भितरवार एक अनार सौ बीमार बन गई है।
डबरा : इस सीट पर पिछले 15 सालों से कांग्रेस का कब्जा है, इमरती देवी यहां से लगातार अच्छे मार्जिन से चुनाव जीत रहीं थीं लेकिन 2020 में इमरती देवी भाजपा में शामिल हो गई तो कांग्रेस के सुरेश राजे से चुनाव हार गईं।



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