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आदिवासी बाहुल्य विजयपुर में अबकी धाकड़ – कुशवाह निर्णायक

सोशल इंजीनियरिंग सत्ता और संगठन के भरोसे रामनिवास रावत, आदिवासी कैंडिडेट उतारकर कांग्रेस ने चला ट्रंप कार्ड

विजयपुर : उपचुनाव भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों के लिए ही टेढ़ी खीर हो गया है, भाजपा प्रत्याशी रामनिवास रावत सत्ता में मंत्री होते हुए भी संगठन का साथ होने के बाद भी पूरी तरह आश्वस्त नहीं है कि उनकी जीत सुनिश्चित है । भाजपा ने कांग्रेस के रामनिवास रावत को अपने पाले में लेकर पहले लोकसभा में जीत हासिल की और अब विधानसभा में जीत हासिल करना चाहती है तो कांग्रेस ने भी भाजपा की पूर्व की सरकार में राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त रहे मुकेश मल्होत्रा को टिकट देकर रामनिवास रावत के सामने नहले पर दहला चलने का काम किया है।

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आदिवासी बाहुल्य सीट है विजयपुर 

विधानसभा क्षेत्र विजयपुर आदिवासी बाहुल्य सीट है ,यहां से भाजपा के सीताराम आदिवासी विधायक रहे हैं और पार्टी ने उन्हें उपचुनाव को दृष्टिगत रखते हुए राज्यमंत्री का दर्जा दे दिया है, इससे पूर्व में मुकेश मल्होत्रा ( कांग्रेस प्रत्याशी ) को भी राज्यमंत्री दर्जा दिया था । क्षेत्रीय राजनीति के जानकार बताते हैं कि वर्तमान भाजपा प्रत्याशी रामनिवास रावत कुल आठ चुनाव लड़े जिनमें से छह बार जीत हासिल की और उनकी जीत के पीछे भी आदिवासी वोट बैंक ही रहा है,उपचुनाव में आदिवासी वोट बैंक भाजपा की झोली से खिसकता हुआ दिखाई दे रहा है और अगर ऐसा हुआ तो भाजपा प्रत्याशी रामनिवास रावत की राह मुश्किल हो जाएगी।

धाकड़ और कुशवाह वोट बैंक होगा निर्णायक

विजयपुर विधानसभा क्षेत्र में धाकड़ और कुशवाह समाज का वोट बैंक भी बहुमत में है, अभी तक माना जाता रहा है कि शिवराज सिंह चौहान के नाम पर किरार धाकड़ समाज का वोट भाजपा का परंपरागत वोट बन गया था और ये बात काफी हद तक सत्य भी है लेकिन शिवराज सिंह चौहान के केंद्र में चले जाने के बाद धाकड़ समाज का वोट भाजपा को मिलना मुश्किल है क्योंकि शिवराज को सीएम नहीं बनाए जाने के बाद से किरार समाज काफी नाराज हुआ था । विजयपुर विधानसभा सीट पर कुशवाह वोट भी बड़ी संख्य में बीते चुनावों में कुशवाह प्रत्याशी चुनावी मैदान में रहा और बहुजन वोट के साथ तीसरी ताकत बनकर उभरा लेकिन उपचुनाव में न तो बहुजन समाज पार्टी चुनावी मैदान में है और न ही कुशवाह समाज से कोई प्रत्याशी ,ऐसे में सीधे तौर पर कांग्रेस को फायदा होता दिखाई दे रहा है।

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Chief Editor JKA

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