18 वर्ष से अधिक आयु के प्रत्येक व्यक्ति की आभा पहचान संख्या बनाकर बीपी एवं शुगर की जांच करें
गांव-गांव पहुंचकर मधुमेह एवं उच्च रक्तचाप की समय पर पहचान और उपचार सुनिश्चित करने पर जोर

मधुमेह एवं उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों की समय पर पहचान और उपचार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कलेक्ट्रेट सभागार, मुरैना में सुहास परियोजना के अंतर्गत कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में स्वास्थ्य विभाग, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन एवं स्वयं सहायता समूहों के प्रतिनिधियों को परियोजना की कार्यप्रणाली एवं विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी गई।
कलेक्टर श्री लोकेश कुमार जांगिड़ ने कहा कि मैदानी स्वास्थ्य कार्यकर्ता 18 वर्ष से अधिक आयु के प्रत्येक व्यक्ति की आभा पहचान संख्या बनाएं और उसकी बीपी एवं शुगर की जांच सुनिश्चित करें। जांच के दौरान यदि किसी व्यक्ति का बीपी अथवा शुगर अधिक पाया जाता है, तो उसे आवश्यक जांच एवं उपचार के लिए स्वास्थ्य संस्था तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाए। साथ ही संबंधित व्यक्ति की जानकारी निर्धारित पोर्टल पर दर्ज कर नियमित रूप से उसकी निगरानी की जाए। उन्होंने कहा कि बीमारी की समय पर पहचान होने से उपचार शुरू कर उसे नियंत्रित किया जा सकता है। इसलिए कोई भी व्यक्ति जांच से वंचित न रहे, यह सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।
सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी श्री आर.एस. जुलानिया ने बताया कि भारत सरकार के नेतृत्व में मध्यप्रदेश के चिन्हित जिलों में मुरैना भी शामिल है। उन्होंने स्वास्थ्य एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के मैदानी अमले से गांव-गांव पहुंचकर 18 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की बीपी एवं शुगर की जांच सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने कहा कि केवल जांच करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि जांच में बीपी अथवा शुगर अधिक पाए जाने वाले व्यक्ति को आगे की जांच एवं उपचार के लिए स्वास्थ्य संस्था तक पहुंचाना भी सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि समय पर बीमारी की पहचान होने से आवश्यक उपचार शुरू किया जा सकता है और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर जटिलताओं से बचाव में मदद मिलती है।
सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी डॉ. मनोहर अगनानी ने कहा कि मधुमेह की जांच एवं उपचार के निर्धारित मानकों की जानकारी मैदानी कार्यकर्ताओं को होना आवश्यक है। उन्होंने खाली पेट एवं भोजन के बाद शुगर की जांच के संबंध में आवश्यक जानकारी रखने तथा जांच के परिणाम समय-समय पर निर्धारित पोर्टल पर दर्ज करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों में शुगर की समस्या पाई जाती है, उन्हें नियमित दवा एवं उपचार उपलब्ध कराने के साथ उनकी निरंतर निगरानी की जाए, ताकि बीमारी को नियंत्रित रखने में मदद मिल सके।
कार्यशाला में ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को बीपी एवं शुगर की नियमित जांच के लिए प्रेरित करने, बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा जांच में चिन्हित व्यक्तियों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने पर भी चर्चा की गई। मैदानी अमले से कहा गया कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों से निरंतर संपर्क कर स्वास्थ्य जांच के महत्व की जानकारी दें और पात्र व्यक्तियों को आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ें।
कार्यशाला में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पदमेश उपाध्याय, महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी, अम्बाह एवं पोरसा के बाल विकास परियोजना अधिकारी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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