डीन को देखते ही छलके आंसू, बोलीं- सर आपने मदद नहीं की होती तो शायद आज खड़ी नहीं हो पाती
6 जुलाई को घर में पैर फिसलने से हुआ था फ्रैक्चर, डीन ने स्वयं किया था ऑपरेशन

ग्वालियर । पैर की चोट से उबरने के बाद दोबारा ड्यूटी पर लौटीं गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय (जीआरएमसी) के एकाउंट विभाग की कर्मचारी प्रफुल्ला मिंज से मिलने डीन डॉ. आरकेएस धाकड़ पहुंचे। डीन को सामने देखते ही प्रफुल्ला की आंखों से खुशी के आंसू छलक उठे। उन्होंने भावुक होकर कहा, सर, आपने समय पर मदद नहीं की होती तो शायद आज मैं अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो पाती। इस पर डॉ. धाकड़ ने कहा आप सभी लोग मेरे परिवार के सदस्य हैं और परिवार के सदस्य के साथ वह हर समय खड़े हैं। इसके बाद डीन ने उनके पैर का मूवमेंट देखा। पैर की स्थिति सामान्य नजर आई। प्रफुल्ला ने चलकर भी डीन को दिखाया कि वह अब पहले की तरह सामान्य रूप से चल पा रही हैं।
जीआरएमसी में एलडीसी के पद पर कार्यरत 56 वर्षीय प्रफुल्ला मिंज घर में अकेली रहती हैं। छह जुलाई को रसोई में जाते समय फर्श पर पानी होने के कारण उनका पैर फिसल गया और वह गिर पड़ीं। हादसे में उनके सीधे पैर में फ्रैक्चर हो गया। घटना की जानकारी मिलते ही डीन डॉ. धाकड़ ने तत्काल एंबुलेंस और दो कर्मचारियों को उनके घर भेजा और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया। डॉ. धाकड़ ने स्वयं उनके पैर का ऑपरेशन किया। सामान्य तौर पर फ्रैक्चर में प्लेट लगाने के लिए अपेक्षाकृत बड़ा चीरा लगाना पड़ता है, लेकिन इस मामले में उन्होंने आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए छोटा चीरा लगाया। घुटने के पास किए गए छोटे चीरे के जरिए सी-आर्म मशीन की लाइव एक्स-रे गाइडेंस में प्लेट को फ्रैक्चर वाली जगह तक पहुंचाया गया। इसके बाद स्क्रू की मदद से प्लेट को सुरक्षित रूप से फिक्स किया गया । कम चीरे वाली इस तकनीक से बड़ा घाव नहीं हुआ और प्रफुल्ला जल्द स्वस्थ होकर अपनी ड्यूटी पर लौट सकीं। डीन से मुलाकात के दौरान उनकी आंखों से छलके आंसू इस पूरे घटनाक्रम के भावनात्मक पक्ष को बयां कर रहे थे।
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