निकाय चुनाव के दावेदारों में मायूसी

मध्य प्रदेश राज्य के बारे में अब एक नई कहावत बन गई है कि यह मध्यप्रदेश एक अकेला ऐसा राज्य है जहां फॉर्म तो डाले जाते हैं लेकिन ना तो परीक्षा होती है और ना चुनाव होते हैं । दरअसल मध्य प्रदेश में बीते कुछ सालों में कई ऐसी पात्रता परीक्षा हैं जिनके फॉर्म तो परीक्षार्थियों ने डाल दिए हैं लेकिन उनकी परीक्षा आज दिनांक तक नहीं हुई । कई तो इनमें ओवरेज हो रहे हैं लेकिन सरकार है कि सुनने का नाम नहीं लेते । बार-बार कोरोना का बहाना बनाकर परीक्षा टाली जा रही हैं हालांकि कोरोना तब नहीं आता जब मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव होने होते हैं ।
जिस प्रकार पात्रता परीक्षा के फॉर्म भरवा लिए गए लेकिन परीक्षाएं नहीं करवा पाए, ऐसा ही कुछ हाल ही में मध्यप्रदेश की पंचायत राजनीति में हुआ है । पंचायत चुनाव में प्रथम चरण के नाम निर्देशन पत्र भरवा लिए गए लेकिन चुनाव नहीं हुए । चुनाव निश्चित अवधि के लिए टल गए हैं चुनाव टलने का कारण हो ओबीसी आरक्षण है । मध्य प्रदेश सरकार निकाय चुनाव, पंचायत चुनाव को लेकर संवेदनशील नहीं है और ना ही अपनी रुचि दिखाती है ।
मध्य प्रदेश की राजनीति में पहले ही 2 साल से अधिक लेट चल रही पंचायतों , निकाय चुनाव को लेकर पंचायत चुनाव और निकाय चुनाव की दावेदारी करने वालों की चेहरों पर एक बार फिर मायूसी छा गई है । क्योंकि अभी प्रदेश में निकाय चुनाव को लेकर कोई खबर नहीं है। ऐसा माना जा रहा है कि पहले पंचायत चुनाव जो कि अभी हाल ही में लंबित हुए हैं उन्हें कराया जाएगा उसके बाद निकाय चुनाव होंगे । निकाय चुनाव के लिए दावेदारी करने वाले और अपनी राजनीति बिसात बिछाकर पूरी तैयारी कर चुके दावेदारों के चेहरों पर मायूसी के सिवा कुछ नहीं है । क्योंकि वे लंबे समय से क्षेत्र में सक्रिय थे और अपनी राजनीतिक भूमिका तैयार कर रहे थे लेकिन 2 वर्ष से भी अधिक देरी से चल रहे चुनाव एक बार फिर अनिश्चितकालीन समय के लिए टल गए हैं । ऐसे में पुराने जनप्रतिनिधि सरकारी धन को ठिकाने लगा रहे हैं वह नवागत दावेदार मायूस दिखाई दे रही हैं ।

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