आधुनिक चिकित्सा शिक्षा में सनातन संस्कृति की भूमिका अहम : प्रो. डॉ. धाकड़
- जीआरएमसी में नवप्रवेशित एमबीबीएस विद्यार्थियों ने ली महर्षि चरक शपथ - एमबीबीएस द्वितीय वर्ष और प्री-फाइनल के विद्यार्थियों ने पुष्प वर्षा कर किया नवीन विद्यार्थियों का स्वागत

ग्वालियर, गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय में एमबीबीएस सत्र-2025 में प्रवेश लेने वाले नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए शनिवार को महर्षि चरक शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन महाविद्यालय प्रांगण में किया गया। महाविद्यालय अधिष्ठाता प्रो.डॉ.आर.के.एस.धाकड़ ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विद्यार्थियों को शपथ दिलाई।
समारोह के आरंभ में एमबीबीएस द्वितीय वर्ष और प्री-फाइनल के विद्यार्थियों द्वारा नवप्रवेशित छात्र-छात्राओं का पुष्प वर्षा कर आत्मीय स्वागत किया गया। तत्पश्चात मंचासीन अतिथियों द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा एवं महर्षि चरक के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय अधिष्ठाता डॉ.आर.के.एस.धाकड़, संयुक्त संचालक एवं अधीक्षक डॉ.सुधीर सक्सेना, वरिष्ठ चिकित्सक डॉ.प्रियंवदा भसीन, आईएमए ग्वालियर ब्रांच अध्यक्ष डॉ. सुनील अग्रवाल, आईएमए सचिव डॉ.अनुराग चौहान, फिजियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ.अजीत राजपूत, बायोकेमिस्ट्री विभागाध्यक्ष डॉ. संजीव सिंह, एनाटॉमी विभागाध्यक्ष डॉ. अखिलेश त्रिवेदी मंचासीन थे।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. डॉ. आर.के.एस. धाकड़ ने कहा कि नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए यह दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहीं से उनके चिकित्सा जीवन की औपचारिक शुरुआत होती है। उन्होंने कहा कि जब विद्यार्थी अपने घर-परिवार से दूर एक श्रेष्ठ चिकित्सक बनने का संकल्प लेकर महाविद्यालय में प्रवेश करते हैं, तब उन्हें यह महसूस नहीं होना चाहिए कि वे अकेले हैं। महाविद्यालय, शिक्षक एवं वरिष्ठ चिकित्सक सदैव उनके अभिभावक के रूप में मार्गदर्शन के लिए उपलब्ध हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिक चिकित्सा शिक्षा का आधार भारत की समृद्ध सनातन संस्कृति एवं नैतिक मूल्यों में निहित है, जिसे विद्यार्थियों को अपने आचरण में आत्मसात करना चाहिए। संयुक्त संचालक एवं अधीक्षक डॉ. सुधीर सक्सेना ने अपने संबोधन में कहा कि अब विद्यार्थी इस प्रतिष्ठित चिकित्सा महाविद्यालय का प्रतिनिधित्व करते हैं, इसलिए उनके आचरण, व्यवहार एवं कार्य में इसकी गरिमा स्पष्ट रूप से परिलक्षित होनी चाहिए। कार्यक्रम का संचालन डॉ.मनीष चतुर्वेदी ने किया और कार्यक्रम की रुपरेखा डॉ.प्रीति पंचोली, डॉ.गौरव जैन व डॉ.गजेंद्र धाकड़ द्वारा बनाई गई। यहां बता दें कि गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय, एमबीबीएस में यूजी छात्र-छात्राओं के लिए इस तरह का आयोजन करने वाला मध्यप्रदेश का पहला महाविद्यालय है। इस मौके पर महाविद्यालय के चिकित्सा शिक्षक व कर्मचारी मौजूद रहे।
यह दिलाई शपथ
महर्षि चरक शपथ भावी चिकित्सकों को संयम, अनुशासन और नैतिकता के मार्ग पर अग्रसर करने वाली प्रेरणास्रोत है। इस शपथ के माध्यम से विद्यार्थियों ने संकल्प लिया कि वे अपने अध्ययनकाल में सात्विक एवं अनशासित जीवन व्यतीत करेंगे तथा गुरु के प्रति पूर्ण समर्पण और सम्मान बनाए रखेंगे। उन्होंने यह प्रतिज्ञा की कि चिकित्सा ज्ञान का उपयोग केवल व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि प्राणिमात्र के कल्याण हेतु करेंगे। रोगी की सेवा को सर्वोच्च कर्तव्य मानते हुए, गोपनीयता, करुणा, विनम्रता और सत्यनिष्ठा का पालन करेंगे
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