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प्राकृतिक खेती अपनाकर आत्मनिर्भर बने छिंदवाड़ा जिले के ग्राम सामरबोह के कृषक श्री रामचरण राउत

तरबूज-खरबूज के उत्पादन से भी बनाई अपनी पहचान

छिन्दवाड़ा जिला प्रदेश में ही नहीं वरन् पूरे देश में अपने प्राकृतिक सौंदर्य को लेकर एक अनूठी पहचान रखता है । साथ ही कृषि परिवेश के दृष्टिगत कृषि, उद्यानिकी और वनोपज की प्रचुरता से परिपूर्ण है। जिले की यह विशिष्टता जिले के प्रगतिशील किसानों के कारण ही है । इसी कड़ी में जिले के विकासखंड बिछुआ के ग्राम सामरबोह के प्रगतिशील कृषक श्री रामचरण राउत प्राकृतिक खेती कर आत्मनिर्भर बनने के साथ ही आर्थिक रूप से सक्षम हो रहे हैं। कृषक श्री राउत पूरे वर्ष जैव उर्वरक व जैव कीटनाशक स्वयं ही तैयार करके जहां फसलें लेकर आत्मनिर्भर बने हैं, वही खेती की लागत को कम करते हुए अधिक मुनाफा भी कमा रहे है। कृषक द्वारा फसल विविधीकरण कर वर्ष भर आय प्राप्त की जा रही है।
प्रगतिशील कृषक श्री रामचरण राऊत के पास लगभग 3.50 एकड कृषि भूमि है जिसमें वे विगत 5-6 वषों से प्राकृतिक व जैविक खेती कर रहे है। । उनके द्वारा वर्ष पर्यन्त खरीफ मौसम में टमाटर, मिर्च, सोयाबीन, धनिया, रबी मौसम में चुकुन्दर, टमाटर, ब्रोकली, गोभी और जायद मौसम में तरबूज, खरबूज और टमाटर की फसल ली जा रही है। तरबूज-खरबूज निकालने के पश्चात स्वीट कॉर्न लेने की कार्य योजना ली गई है। इस तरह किसान द्वारा वर्ष भर फसलें ली जाकर वर्ष भर कृषि से निरंतर आय अर्जित की जा रही है। कृषक के पास 4 गिर किस्म की देशी गाय है जिसके गौ-मूत्र व गोबर से कृषक द्वारा जीवामृत और घनामृत तैयार किया जाकर जैव उर्वरक के रूप में उपयोग किया जा रहा है। जैव कीटनाशक के लिये नीम, करेला, लहसुन आदि से तैयार जैविक कीटनाशक का उपयोग कर कृषक द्वारा खेती की लागत को कम किया गया है । कृषक के खेत में उन्नत तकनीकी से कृषि की जा रही है। इसके लिये कृषक द्वारा ड्रिप एवं मल्चिंग के उपयोग से जल संरक्षण की ओर भी कार्य किया जा रहा । किसान द्वारा इस वर्ष ड्रिप व मल्चिंग विधि से लगभग 20 डिसमिल जमीन में अभिलाष किस्म का टमाटर लगाया गया और इससे किसान ने लगभग 2.50 लाख रूपये का शुध्द मुनाफा प्राप्त किया । इसके बाद उन्होंने लगभग एक एकड में ड्रिप व मल्चिंग विधि से तरबूज व खरबूज की फसल लगाई जिससे भी उन्हे लगभग 60 हजार रूपये का शुध्द लाभ प्राप्त हुआ है । तरबूज एवं खरबूज की फसल निकालने के पश्चात कृषक द्वारा अब एक एकड़ में स्वीट कॉर्न लगाया गया है और यह फसल लगभग 15 दिन की हो गई है। प्राकृतिक खेती के ऐसे उत्साहजनक परिणामों को देखते हुए अन्य कृषकों द्वारा भी प्रेरित होकर प्राकृतिक एवं आधुनिक तकनीकी अपनाने को लेकर योजना बनाई गई है

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Chief Editor JKA

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