शादी के लिए ना कहने वाले शिवराज की बड़ी दिलचस्प है कहानी, साधना को कैसे दे बैठे दिल
अखिल भारतीय किरार क्षत्रिय महासभा की राष्ट्रीय अध्यक्ष साधना सिंह चौहान एवं मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को वैवाहिक वर्षगांठ की बहुत-बहुत बधाई

इंजी. वीरबल सिंह
अखिल भारतीय किरार क्षत्रिय महासभा की राष्ट्रीय अध्यक्ष साधना सिंह की पहली पहचान निश्चित रूप से एमपी के सीएम शिवराज सिंह चौहान की पत्नी के रूप में है, लेकिन उनकी शख्सियत के कई और पहलू भी हैं। एक कुशल प्रबंधक, बेहतरीन रणनीतिकार, चुनाव प्रचारक, इलेक्शन मैनेजर…. ये सारी खूबियां साधना सिंह की शख्सियत का हिस्सा हैं और यही उन्हें अन्य मुख्यमंत्रियों की पत्नियों से अलग बनाती हैं। महाराष्ट्र के गोंदिया में जन्मी साधना सिंह शिवराज सिंह चौहान से शादी के बाद मध्यप्रदेश आईं। शिवराज खुद स्वीकार करते हैं कि उनके राजनीतिक जीवन में पत्नी साधना सिंह का बहुत बड़ा योगदान है। राजनीति के साथ-साथ प्रशासनिक मामलों में भी मजबूत पकड़ रखने वाली साधना सिंह को प्रदेश की जनता मामी व राजनेता भाभी कह कर बुलाते हैं।

प्रदेश के मुख्यमंत्री और बीजेपी के कद्दावर नेता शिवराज सिंह चौहान अपनी शादी की सालगिरह मना रहे हैं। दिन भर उनके घर बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। शिवराज की शख्सियत की तरह ही उनकी लव-लाइफ और शादी के किस्से भी काफी मजेदार हैं। शुरू-शुरू में शिवराज सिंह चौहान आरएसएस से जुड़े और शादी नहीं करने का ऐलान कर दिया। उनके परिवार ने काफी दबाव भी बनाया, मगर उन्होंने ठान लिया था कि वह अविवाहित ही रहेंगे। परिवार में उनसे छोटे भाई-बहनों की शादी हो गई, लेकिन शिवराज कुंवारे ही रहे। हालांकि, एक दिन ऐसा आया जब उन्होंने साधना सिंह को देखा और अपना दिल दे बैठे। फिर क्या था, चिट्ठियों का आदान-प्रदान और छुप-छुपकर मिलने का दौर चला और बाद में दोनों ने शादी कर ली।

5 मार्च 1959 को सिहोर जिले के जैतगांव में जन्मे शिवराज 1972 में संघ से जुड़ गए थे। देश में लगे आपातकाल के दौरान वह 1976 से 1977 के बीच भोपाल जेल में भी रहे। इस दौरान अविवाहित शिवराज लोगों के बुनियादी जरूरतों को लेकर आंदोलन भी किए और 1990 में पहली बार विधायक बने और 1991 विदिशा लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुनकर संसद पहुंचे। लेकिन, उनकी जिदंगी में असल ट्विस्ट यहीं पर आया। शिवराज की बहन ने उन्हें गोंदिया में रहने वाली साधना सिंह से मिलने का आग्रह किया। काफी मान-मनौव्वल के बाद शिवराज मिलने के लिए राज हो गए। फिर क्या था साधना के घर पहुंचे और एक ही नज़र में उन्होंने अपना दिल दे दिया। मीडिया में छपे तमाम रिपोर्ट्स के मुताबिक एक नज़र देखते हुए उन्होंने शादी के लिए हां भी कर दिया।
साधना सिंह को देखने के बाद शिवराज ने उन्हें एक चिट्ठी लिखी और खुलकर अपने दिल की बात कही। उन्होंने साफगोई से बताया कि उनका जीवन राजनीति से जुड़ा है और दोनों को कब और किन चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राजनीतिक जीवन में सक्रिय होने के नाते दोनो का जीवन सामान्य पति-पत्नी की तरह नहीं रह सकता। तमाम व्यवस्तताओं की वजह से लंबे समय तक वह मिल भी नहीं सकेंगे। हालांकि, चिट्ठी लिखने के बाद दोनों छुप-छुपकर मिलते भी रहे। सबसे अच्छी बात कि शिवराज सिंह चौहान ने साधना को गुलाब का फूल देकर अपने इश्क का इजहार भी किया। इसके बाद दोनों ने 6 मई 1992 को शादी कर ली।
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किसी फिल्म से कम नहीं है इनकी लव स्टोरी
साधना और शिवराज की प्रेम कहानी भी बेहद रोचक है। अपने शुरुआती जीवन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ने के बाद शिवराज सिंह चौहान ने जीवन भर शादी ना करने का निश्चय कर लिया था। छोटे भाई-बहनों की शादी होने के बाद परिवार वालों के दबाव में शिवराज किसी तरह एक बार साधना सिंह से मिलने के लिए राजी हुए। पर नियति को कुछ और ही मंजूर था। जैसे ही शिवराज ने साधना सिंह को देखा, वे उन्हें अपना दिल दे बैठे। साधना को भी शिवराज की सादगी पसंद आई। पहली नजर का प्यार परवान चढ़ने लगा और शादी नहीं करने की कसमें खाने वाले शिवराज उनसे छिप-छिप कर मिलने लगे। शिवराज ने खुद बताया था कि उन्होंने चिट्ठी लिख कर साधना सिंह से अपने प्रेम का इजहार किया था। दोनों ने एक-दूसरे को खूब लव लेटर भी लिखे। फिर घरवालों की सहमति से दोनों ने शादी कर ली। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ मजबूती से खड़ी रहने वाली साधना सिंह एक सफल चुनाव प्रचारक व कुशल प्रबंधक भी हैं।

हमेशा पति के साथ
साधना अपने पति के साथ हर जगह मौजूद होती हैं। चाहे वह चुनावी जन आशीर्वाद यात्रा हो या मुख्यमंत्री कन्या विवाह का आयोजन। इनके साथ होने के कारण शिवराज को अपनी आम आदमी वाली छवि जनता के सामने पेश करने में सरलता होती है।

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