उल्दन बॉध से पानी को लेकर प्रदर्शन ज्ञापन दिया

बकस्वाहा ( शोभित शाह ) :- सागर जिले के बंडा तहसील मे धसान नदी पर बनाये जा उल्दन बॉध से बकस्वाहा विकासखण्ड के 81. गॉवो की 17760.299 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई के लिये पानी मिलना था परंतु कुछ अडचनो का बहाना लेकर सरकार बकस्वाहा क्षेत्र को पानी देना नही चाह रही है या उसमे कुछ बदलाव कर रही है इससे बकस्वाहा क्षेत्र के किसान आक्रोशित है इसी मामले को लेकर आज किसानो ने तहसील मैदान मे प्रर्दशन कर मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार को ज्ञापन दिया। ज्ञापन के माध्यम से किसानो कहा है कि
1 मध्यप्रदेश शासन जल संसाधन विभाग द्वारा बंडा वृहद सिंचाई परियोजना के निर्माण के लिए रु.2610.54 करोड़ की प्रशासकीय स्वीकृति वर्ष 2018 में दी गई है।
2. इस परियोजना अन्तर्गत सागर जिला की बंडा तहसील के उल्दन ग्राम से 3.5 किलोमीटर नीचे धसान नदी पर बांध का निर्माण कर कुल 80,000 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि की सिंचाई की जाना प्रावधानित है, जिसमें सागर जिले की मालथोन तहसील में 36,000हेक्टेयर, बंडा व शाहगढ़ तहसील में 28,400 हेक्टेयर व छतरपुर जिले की बकस्वाहा तहसील में 15,600 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि में पाइपों द्वारा जल परिवहन कर प्रेशराइज्ड माइक्रो इरीगेशन प्रणाली द्वारा सिंचाई की जाना है।
3. इस परियोजना के निर्माण के लिए रु 1526.44 करोड़ का ठेका वर्ष 2018 में टाटा प्रोजेक्ट लिमिटेड को दीया गया।
4. ठेका अनुबंध के अनुसार ठेकेदार को बांध का निर्माण तथा सागर जिले में 64,400 हेक्टेयर एवं छतरपुर जिले की बकस्वाहा तहसील में 15600 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रेशराइज्ड माइक्रो इरीगेशन प्रणाली से स्प्रिंकलर द्वारा सिंचाई सृजित की जानी है।
5. ठेका अनुबंध में यह शर्त रखी गई है कि प्रावधानिक सिंचाई की न्यूनतम 80 प्रतिशत सींचाई सृजित की जाना अनिवार्य है। इस शर्त के अनुसार परीयोजना अन्तर्गत बकस्वाहा तहसील में न्यूनतम 12480 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि में सिंचाई सृजित की जाना अनिवार्य है।
6. विगत 4 वर्षों में ठेका अन्तर्गत बांध का निर्माण कार्य प्रगति पर है तथा सागर जिले में पाइप लाइन बिछाने का कार्य भी किया जा रहा है, परन्तु छतरपुर जिले की बकस्वाहा तहसील में को कार्य प्रारंभ नहीं किया गया है। बकस्वाहा नगर के पास बनाये ग्रे स्टोर में रक्खे पाइप भी अन्यत्र भेज दिये गये हैं।
7. छतरपुर जिले की बकस्वाहा तहसील बुन्देलखण्ड का सबसे पिछड़ा व सूखाग्रस्त क्षेत्र है जहां पीने के पानी तक की विकट समस्या है। इस क्षेत्र का प्रमुख व्यवसाय कृषि है जो पूर्णतः वर्षा आधारित है। सिंचाई हेतु जल स्त्रोतों का अभाव है।
8. इस क्षेत्र के कृषक बंडा वृहद सिंचाई परियोजना में प्रावधानित सिंचाई से अत्यंत आशान्वित हैं। पर परियोजना का ठेका दिये जाने के चार वर्ष व्यतीत हो जाने के पश्चात भी बकस्वाहा तहसील में कोई कार्य प्रारंभ न होने तथा स्टोर में रक्खे पाइप भी उठा लिए जाने से इस क्षेत्र की जनता अत्यंत शंशकित व निराशा से ग्रसित होकर आन्दोलित है।
8. ऐसा ज्ञात हुआ है कि बकस्वाहा तहसील का क्षेत्र ऊंचाई पर होने, बांध से दूरी अधिक होने व पाइप से पानी पहुंचाने में विद्युत की अधिक खपत का बहाना लेकर बकस्वाहा तहसील के क्षेत्र को कम करने या
इस क्षेत्र के एवज में सागर जिले में ही सिंचाई रकबा बढ़ाने का कोई प्रस्ताव विभाग द्वारा शासन को भेजे जाने की तैयारी चल रही है।
परियोजना में विद्युत की खपत 28 मेगा वाट है, अब विभाग के प्रस्ताव में इसे 31 मेगावाट दर्शाते हुए निम्न प्रस्ताव दिए हैं –
(अ.) बांध के रिजर्वायर से ग्राम उल्दन के पास एक पम्प हाउस बना कर पानी एक नहर में डाला जायेगा जो बंडा नगर के समीप से निकलने वाली बीला फीडर केनाल में मिलेगी। बीला फीडर केनाल पर फिर एक पम्प हाउस बना कर पानी बकस्वाहा तहसील के लिए भेजा जाएगा।
इस प्रस्ताव के दो मुख्य उद्देश्य हैं (1) कुछ दूरी तक पाइप लाइन के एवज में खुली नहर से पानी पानी ले जाने पर योजना में लगने वाले पाइपों की बचत होगी। ( ठेकेदार की बचत) (2) पाइप लाइन की लम्बाई घटने से, पाइप लाइन में घर्षण से होने वाली ऊर्जा की बचत होगी। अतः विद्युत की खपत कम होगी व बनाये गये प्रस्ताव के अनुसार परीयोजना के लिए प्रावधानित कुल 28 मेगावाट विद्युत से अधिक खपत नहीं होगी। (3) बीला फीडर के माध्यम से पानी बीला बांध में डालकर अतिरिक्त सिंचाई की जा सकेगी।
इस प्रस्ताव में जो मुख्य खामी वह यह है कि (1)खुली नहर से पानी का परिवहन होने पर नहर के दोनों तरफ की जमीनों के किसान पम्प से पानी ले लेंगे। इनकी चौकीदारी कर पाना असम्भव है। (2) बीला फीडर केनाल में पानी डाल कर बीला बांध में पानी डालने का प्रावधान होने से पानी के बंटवारे में शाहगढ़ व बकस्वाहा के किसानों में हमेशा झगड़ा होगा। बकस्वाहा का पम्प हाउस सागर जिले में होने से प्रशासनिक व पुलिस अमला सागर का ही होने से बकस्वाहा के किसान असहाय हो जायेंगे वो फायदा सागर के किसानों को ही होगा, बकस्वाहा में पाइप लाइन तो होगी पर पानी नहीं मीलेगा।
(ब) दूसरा प्रस्ताव यह है कि परियोजना के लिए प्रावधानित 28 मेगावाट विद्युत खपत को बढ़ा कर 31 मेगावाट कर दिया जावे। इसमें प्रति वर्ष शासन को अधिक व्यय वहन करना होगा। परन्तु इससे बकस्वाहा तहसील को सुचारू रूप से सिंचाई का पानी उपलब्ध हो सकेगा।
बकस्वाहा तहसील में शासकीय ऊसर भूमि काफी मात्रा में उपलब्ध है वह सूर्य की रोशनी भी सहजता से उपलब्ध है। अतः सोलर पावर प्लांट लगाकर, विद्युत की व्यवस्था सरलता से हो सकती है। इसमें शासन पर एक बार लागत का भार आयेगा, पर इससे विद्युत उत्पादन व वितरण कर न केवल परियोजना को विद्युत उपलब्ध करायी जा सकेगी वरन् अतिरिक्त विद्युत का उपयोग अन्यंत्र भी किया जा सकेगा।
. ज्ञापन देने बालो मे बकस्वाहा क्षेत्र समस्त राजनीतिक दलो के नेता और क्षेत्र के सैकड़ों की संख्या मे किसान शामिल हुये।

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