ग्रामीण विकास की रीढ़ GRS हड़ताल पर, लाड़ली बहना ठप्प

विशेष खबर : देश का विकास ग्रामों से होकर जाता है और यह बात सौ फीसदी सही भी है, और इसी बात को ध्यान में रखते हुए महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना जैसी महत्त्वाकांक्षी योजना बनाई गई, इस योजना को मूर्त रूप दिया जा सके इसके लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत में ग्राम रोजगार सहायक ( जीआरएस ) की नियुक्ति की गई थी। जीआरएस का पद सरकार ने अस्थाई तौर पर भरे थे और नाम मात्र की तनख्वाह पर। जितनी पगार सरकार जीआरएस को दे रही हैं वो एक दिहाड़ी मजदूर से भी कम है, इस अस्थाई शासकीय सेवा में होने के चलते जीआरएस को सरकार अपनी सभी योजनाओं से वंचित भी कर देती हैं यानी एक तरफ काम का बोझ और दूसरी तरफ आर्थिक रूप से उन्हें कमजोर ही रखा है। करीब एक दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी प्रदेश की भाजपा की शिवराज सरकार ने जीआरएस की कोई सुध नहीं उलट इसके जब भी जीआरएस संगठन ने अपनी मांग उठाई तो शिवराज सरकार ने उन पर लाठियां बरसाने का काम बखूबी किया ।
शिवराज सिंह चौहान एक के बाद एक नई योजना बनाकर अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में लगे हैं और इसी क्रम में उन्होंने लाडली बहना योजना बनाई तो इसका प्रचार प्रसार किसी चुनावी कैंपेन से कम में किया जा रहा है, इसके प्रचार प्रसार में सरकारी खजाना खूब लुटाया जा रहा है लेकिन जीआरएस संगठन की मांगों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। लाडली बहना योजना के फॉर्म भरने से लेकर प्रचार प्रसार और ekyc तक की जिम्मेदारी जीआरएस को सौंपी तो नाराज रोजगार सहायक सचिवों ने हड़ताल कर दी नतीजन मुख्यमंत्री की महत्त्वाकांक्षी योजना जमीनी स्तर पर दम तोड़ती दिखाई दे रही है। जीआरएस संगठन से मिली जानकारी के अनुसार उनकी तरफ से नियमितिकरण और मानदेय को लेकर हड़ताल की गई है, इतना ही नहीं उन्होंने बताया कि उन्हें अनुग्रह सहायता भी दी जानी चाहिए इसलिए उनकी तरफ से अनिश्चितकालीन हड़ताल की गई है। इस बार वे केवल अपनी जायज मांगों को लेकर ही नहीं बल्कि मांग न मानने पर आगामी विधानसभा चुनाव में आर पार करने को तैयार बैठे हैं, यदि ऐसा हुआ तो इसका सीधा असर विधानसभा चुनाव में मौजूदा सरकार पर पड़ सकता है क्योंकि जीआरएस सीधे तौर सभी योजनाओं के लिए जनता से जुड़ा रहता है। जीआरएस की हड़ताल होने से ग्रामीण विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं तो लाडली बहना योजना भी ठप्प पड़ गई है।


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