बड़ी बहन ने बहनोई से रचाई शादी तो छोटी बोली मुझे भी जीजा से..

कानून की चौखट पर जमीन-जायदाद और अपराध के किस्से तो आम हैं, लेकिन ग्वालियर स्थित मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में एक ऐसा अतरंगी मामला पहुंचा जिसने ‘पति, पत्नी और वो’ की कहानी को बिल्कुल नया और चौंकाने वाला मोड़ दे दिया। यहां दो सगी बहनों ने सामाजिक बंदिशों और लोक-लाज को दरकिनार करते हुए अदालत के सामने अपने पतियों को आपस में बदलने की ख्वाहिश जाहिर कर दी। यह पूरा विवाद तब सार्वजनिक हुआ जब गिरजाशंकर नाम के व्यक्ति ने अपनी पत्नी सुनीता और छोटी बेटी के अपहरण की याचिका दायर की। उसे उम्मीद थी कि कोर्ट के दखल से उसका घर फिर बस जाएगा, लेकिन अदालत के कमरे में जो हुआ उसने कानून के जानकारों को भी सोच में डाल दिया।
जैसे ही मामला सुनवाई पर आया, सुनीता ने जज के सामने दो टूक कह दिया कि उसका अपहरण नहीं हुआ है। उसने खुलासा किया कि वह अपनी मर्जी से दतिया निवासी मायाराम के साथ रह रही है, जो रिश्ते में उसका सगा बहनोई यानी जीजा है। सुनीता ने बताया कि वह अपने पति से तलाक का केस पहले ही फाइल कर चुकी है और अब वह अपने जीजा के साथ ही जिंदगी बिताना चाहती है। कहानी ने सबसे विचित्र मोड़ तब लिया जब मायाराम की पत्नी और सुनीता की सगी छोटी बहन गीता ने इस रिश्ते पर नाराजगी जताने के बजाय इसका खुलकर समर्थन कर दिया। गीता ने भरी अदालत में कहा कि अगर उसकी बड़ी बहन उसके पति के साथ रहना चाहती है, तो उसे कोई आपत्ति नहीं है।
बात सिर्फ इतनी ही नहीं थी; गीता ने आगे बढ़ते हुए अपना भी पत्ता खोल दिया। उसने कोर्ट से कहा कि वह अब अपने जीजा यानी सुनीता के पति के साथ रहना चाहती है। दोनों बहनों के अपने-अपने बच्चे हैं, लेकिन वे एक-दूसरे के पतियों के साथ ‘पार्टनर एक्सचेंज’ कर नए सिरे से घर बसाने की जिद पर अड़ी रहीं। कोर्ट रूम में मौजूद वकील और अधिकारी रिश्तों के इस उलझे हुए गणित को सुनकर सन्न रह गए। ग्वालियर हाई कोर्ट ने जब पाया कि दोनों महिलाएं बालिग हैं और अपनी मर्जी से यह फैसला ले रही हैं, तो उन्होंने इसे अपहरण का मामला मानने से इनकार कर दिया। अदालत ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि यहां किसी को बंधक नहीं बनाया गया है, बल्कि यह आपसी सहमति से उपजा एक अजीबोगरीब पारिवारिक विवाद है। #MPKiBaat #gwalior #HighCourtNews #jija #bahnoi #MPNews #MadhyaPradesh

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