खण्डवा उपचुनाव : पाटिल की जीत से इनका भविष्य पर प्रश्नचिन्ह

उपचुनाव हो गए, नतीजे आ गए, भाजपा खुश हुई तो कांग्रेस मायूस। आरोप-प्रत्यारोप हुए, रूठने-मनाने का सिलसिला चला। किसी ने दल बदला तो किसी ने निष्ठा, मगर जनता ने अपना मत देकर अपनी मंशा बता दी। इन उपचुनावों में सबसे ज्यादा चर्चा हुई खंडवा लोकसभा की और इसके परिणामों ने भविष्य के राजनीतिक संकेत भी दिए हैं।
दरअसल खंडवा लोकसभा इसलिए भाजपा के लिए अहम थी क्योंकि इस सीट से लगातार नंदकुमार सिंह चौहान जीते थे। इस कारण भाजपा ने यहां पूरी ताकत झोंकी और नतीजे पक्ष में आए लेकिन यह जीत इतनी आसान नहीं रही क्योंकि कांग्रेस ने मुकाबला एकतरफा नहीं होने दिया। भाजपा को वोट प्रतिशत भी घटा तो कुछ विधानसभा क्षेत्रों से भाजपा की लीड कम भी हुई। अपनों के बगावती तेवर भी भाजपा को भुगतने पड़े और जो नेता तीन से पांच लाख की जीत के दावे कर रहे थे उनको भी इस जीत की चमक फीकी लगी। अब चर्चा चल रही है कि आखिर क्या हुआ ऐसा और अब आगे क्या होगा । आगेेे नंदकुमार चौहान केेे बेटे हर्ष और अर्चनााा चिटनि के राजनैतिक भविष्ययफल संकट केेे बादल मंडरा सकते हैं ।

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