निकाय चुनाव नजदीक, दावेदार लापता

राजनीतिक : सूबे में लंबे समय बाद ही सही नगरीय निकाय चुनाव की आहट राजनीतिक गलियारों से सुनाई दे रही है, अभी हाल ही में पंचायत चुनाव को लेकर चुनाव आयोग द्वारा तैयारी को लेकर बैठक ली गई जिसके तहत अनुमान है कि अक्टूबर के आखिरी और नवम्बर तक आचार संहिता लागू हो सकती है । पंचायत चुनाव के बाद या साथ में ही नगरीय निकाय चुनाव भी कराए जा सकते हैं, प्रशासन जिसकी तैयारी में जुट गया है लेकिन पार्षद से लेकर अध्यक्ष पद की दावेदारी करने वाले क्षेत्र से नदारद हैं, बीते साल चुनावी सुगबुगाहट के साथ कोरोना काल मे दावेदार जनता के बीच पहुँचकर सेवा करने में जुट गए थे, मीडिया से लेकर सोशल मीडिया पर दावेदारों की बहार सी आ गई थी, हर कोई अपने आप को जनसेवक साबित करने की होड़ में लगे थे लेकिन चुनाव टलते ही गुमशुदा हो गए ।
ज्ञात हो कि अब केवल पार्षद पद के लिए ही चुनाव होंगे, अध्यक्ष और महापौर अप्रत्यक्ष रूप से चुने जायेंगे ऐसे में पार्षद के लिए जो दावेदारी पेश कर रहे थे वे एक बार फिर मैदान में किसी न किसी प्रकल्प के माध्यम से जनता के बीच दिखाई दे सकते हैं हालांकि अभी तो वे पूरी तरह से लापता हैं । दावेदारों के सामने अब एक बड़ी समस्या ये भी है कि यदि जानकारी के अनुसार अक्टूबर नवम्बर में ही चुनाव हुए तो उन्हें न केवल जनता के बीच पैठ बनाना है बल्कि टिकिट के लिए अपनी पार्टी मुख्यालय पर हाजिरी लगाने के साथ ही अपने राजनीतिक आका की परिक्रमा के लिए भी समय निकालना होगा । अब कौन किस दल से अपनी दावेदारी पेश करेगा ये तो समय आने पर ही पता चलेगा क्योंकि चुनावी समय में अक्सर दलबदल की बयार आती है जिसमें अनेकों लोग अपने सिद्धांतों से समझौता कर विरोधी दल की नाव पर सवार हो जाते हैं, जो कुछ भी हो लेकिन फिलहाल तो नगरीय निकाय नजदीक हैं और दावेदारों को जनता के बीच पहुंचने की जरूरत है ।

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