पोहरी : कभी टिकिट भी मिलेगा या पार्टी का झंडा उठाती रहेंगी

पोहरी : राजनीति में अलग – अलग तरह के दृश्य देखने को मिलते हैं, कई ऐसे बड़े नेता हैं जिन्होंने कभी चुनाव नहीं लड़ा लेकिन सत्ता का भरपूर सुख भोगा है, कुछ नेता ऐसे भी हैं जो ताउम्र चुनाव लड़ते रहे हैं और जीतते रहे हैं लेकिन इतर इन सबके कुछ लोग ऐसे भी है जो एक लंबे समय से पार्टी का झंडा और डंडा तो उठा रहे हैं लेकिन पार्टी टिकिट के लिए सिर्फ इंतजार ही करा रही है । ऐसी ही एक नेत्री डॉ सलोनी सिंह धाकड़ हैं जो डेढ़ दशक से भी अधिक समय से सूबे की पोहरी विधानसभा क्षेत्र में अपनी राजनीतिक बिसात बिछाकर विधानसभा भोपाल पहुँचने का सपना पाले हुए हैं लेकिन हर बार के विधानसभा आम चुनाव में पार्टी उनको प्रचार में लगा देती है ।
डॉ सलोनी सिंह धाकड़ के पास अब तक की राजनीति में पार्टी का कोई भी संगठनात्मक पद नहीं रहा है, हालांकि उनके नजदीकी सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार भाजपा की विभिन्न कार्यकरणियों में शामिल होने में उन्होंने स्वयं ही स्वीकृति प्रदान नहीं की, इस बात में कितनी सत्यता है ये तो वही जानें । भारतीय जनता पार्टी स्वयं को महिला और पुरुषों को बराबर का महत्व देने वाली पार्टी बताती है, क्षेत्र से एक मात्र महिला कार्यकर्ता जो विधानसभा में टिकिट की दावेदारी रखती हैं, जातिगत वोट बैंक में बहुलता वाले समाज से होने के बावजूद सलोनी सिंह को टिकिट को लेकर निराशा ही हाथ लगती है, टिकिट न मिलने के पीछे का कारण कहीं राजनीतिक आका न होना या आका का मजबूत न होना तो नहीं, या फिर स्वयं सलोनी सिंह की संगठन में कमजोर पकड़ तो नहीं । अंचल की राजनीति नरेंद्र सिंह तोमर पर केंद्रित थी लेकिन सिंधिया के भाजपा में आने के बाद अब इस गुट को साधने पर ही टिकिट की दावेदारी मजबूत होगी । पोहरी की राजनीति में भाजपा की ओर से यशोधरा राजे सिंधिया का दखल रहा है और अब ज्योतिरादित्य सिंधिया के आ जाने से यशोधरा राजे सिंधिया, नरेंद्र सिंह तोमर, ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ साथ शिवराज सिंह चौहान की परिक्रमा के बाद ही टिकिट मिलना संभव हो पाएगा जो कि सलोनी सिंह जैसे व्यक्तित्व के लिए थोड़ा मुश्किल कार्य होगा, ऐसे सवाल अब भी पहेली बनकर उलझा हुआ है कि क्या भारतीय जनता पार्टी डॉ सलोनी सिंह धाकड़ को कभी टिकिट देगी या फिर हरबार पार्टी का झण्डा थमाकर प्रचार करने के लिए कहती रहेगी ।

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