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लंबे समय से है सहसराम-सारंगपुर रोड़ की माँग, अभी भी लंबित

करीब 10 वर्ष पूर्व ग्रामीणों का एक प्रतिनिधि मंडल पैदल पहुँचकर मिलने गया था मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से

बड़ी खबर : सरकार लगातार ग्रामीण इलाकों में सड़कों का जाल बिछाने का काम कर रही है, एक गांव को दूसरे गांव से तो गाँव को मुख्य सड़क मार्ग से जोड़ने का काम प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के माध्यम से चल रहा है । सरकार चुनावी समय में जनता से वादे करती है और वादों के मुताबिक ग्रामीण विकास के प्रयास करती हैं लेकिन एक सड़क ऐसी भी है जिसकी मांग लगभग दी दशक से अंचल के लोग कर रहे हैं । आज से करीब 10 वर्ष पूर्व मात्र 6 किलोमीटर सड़क के लिए ग्रामीणों का एक प्रतिनिधि मंडल पैदल भोपाल पहुँचकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मिलने गया था और उस समय के मुरैना-श्योपुर सांसद नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकात भी की थी जिस पर कलेक्टर मुरैना ने इस सड़क की डीपीआर तैयार करने की बात भी कही थी । सरकार वादे और प्रशासन के दावे सब खोखले साबित हो गए हैं । अभी तक मात्र 6 किलोमीटर की सड़क बनना तो दूर उसके संदर्भ में कोई प्रक्रिया शासन की ओर से नहीं की गई है ।
दरअसल यह बहुप्रतीक्षित सड़क श्योपुर और मुरैना जिले की सीमा में आता है, इसका एक बड़ा हिस्सा श्योपुर जिले की विजयपुर विधानसभा में तो बीच का एक छोटा सा हिस्सा मुरैना जिले की जौरा विधानसभा क्षेत्र में है । दोनों ही विधानसभा क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी के विधायक हैं और राज्य से लेकर केंद्र तक भाजपा की सरकार है इतना ही नहीं क्षेत्रीय सांसद नरेंद्र सिंह तोमर केंद्र में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्रालय का जिम्मा सम्भाले हुए हैं लेकिन इस सड़क को लेकर औऱ जनता की पीड़ा को सुनने वाला कोई न तो शासन है और न ही प्रशासन, अभी हाल ही में एक प्रतिनिधिमंडल शिवराज सरकार के पीडब्ल्यूडी राज्यमंत्री सुरेश राठखेड़ा से भी मिला और इस सड़क की मांग को रखा लेकिन भरोसे के जुमले के अलावा कुछ हाथ न लगा ।

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कितनी जायज़ है इस सड़क मार्ग की माँग

यह सड़क सीधे सारंगपुर से सहसराम को जोड़ती है, इस सड़क से विजयपुर तहसील में आने वाले एक दर्जन गाँव के लोग अपने सरकारी कार्यों के लिए विजयपुर पहुंचते हैं, इसके अलावा कैलारस से विजयपुर आने जाने वाले लोग इसी मार्ग का चयन करते हैं क्योंकि इससे करीब 20 किलोमीटर से कहीं अधिक का फेर बचाकर समय और धन की बचत की जाती है । इसके अलावा सबसे महत्वपूर्ण मांग इसलिए भी उठ रही है क्योंकि अंचल के सुप्रसिद्ध आस्था के केंद्र छिमछिमा हनुमान मंदिर पर प्रति मंगलवार को सैकड़ों की तादात में श्रद्धालुओं की भीड़ इसी मार्ग से निकलती है ऐसे में भक्तों को बरसात के समय में बहुत ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है और सड़क न होने के कारण वाहन से चलना सुगम नहीं होता है ।

10 वर्ष पूर्व सहसराम से भोपाल तक की थी पैदल यात्रा

इसी मार्ग में पड़ने वाले गाँव कुसमानी,बेहटा और गेहतौली के कुछ लोग गाँव से पैदल ही अपनी मांग को सरकार के सामने रखने के लिए भोपाल गए थे । मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बाहर होने के कारण मुलाकात नहीं हो सकी थी लेकिन तत्कालीन सांसद और वर्तमान केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मिलकर ग्रामीणों ने अपनी मांग को रखा था जिस पर प्रशासन ने भी सड़क निर्माण का भरोसा दिलाया था लेकिन आज तक कोई भी प्रशासकीय कार्यवाही नहीं की गई ।

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Chief Editor JKA

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