माया को झटका : चार बच गए लेकिन पार्टी अभी बाकी है

बसपा सुप्रीमो मायावती को एक और तगड़ा झटका लगा है। पार्टी के विधानमंडल दल के नेता और प्रदेश के सबसे रईस विधायक बसपा के गुड्डू जमाली ने बृहस्पतिवार को बसपा से इस्तीफा दे दिया। आजमगढ़ की मुबारकपुर सीट से विधायक शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली को लालजी वर्मा के बसपा छोड़ने के बाद विधानमंडल दल का नेता बनाया गया था। माना जा रहा है कि जमाली सपा में जा सकते हैं।
बृहस्पतिवार को विधायक गुड्डू जमाली के भी किनारा कर लेने के बाद बसपा में केवल चार विधायक रह गए हैं। चार बार सत्ता के शिखर तक पहुंची बसपा इस समय संकट में नजर आ रही है। दरअसल उसके अपने सिपहसालार लगातार पार्टी छोड़ छोड़कर दूसरे दलों में जा रहे हैं। उप्र विधानसभा चुनाव से ऐन पहले पार्टी में भगदड़ की स्थिति है। दस साल में पार्टी छोड़ने वाले महारथियों का सैकड़ा पार हो चुका है। इस समय पार्टी में बस चार विधायक ही रह गए हैं। श्याम सुंदर शर्मा, उमाशंकर सिंह, विनय शंकर तिवारी, आजाद अरिमर्दन फिलहाल पार्टी में सक्रिय विधायक रह गए हैं। अहम बात यह भी है कि बसपा के पिछले दो विधानमंडल दल नेताओं ने ही पार्टी छोड़ दी। ऐसे में अब यह भी सवाल खड़ा हो गया है कि अगला विधानमंडल दल का नेता किसे बनाया जाए। चर्चा इनमें से भी किसी के सपा या भाजपा में जाने की जोरों पर है।
19 में से रह गए चार
2017 के विधानसभा चुनाव में बसपा का प्रदर्शन खराब ही रहा था। कुल 19 सीटें बसपा ने जीतीं थी और इसमें भी एक सीट अंबेडकरनगर जिले के उपचुनाव में पार्टी हार गई थी। यानि पार्टी के पास विधायकों की संख्या 18 रह गई थी। पहले अलग-अलग समय पर पार्टी विरोधी गतिविधियों की बात कहकर 9 विधायकों को निलंबित किया गया। उसके बाद लालजी वर्मा और राम अचल राजभर का निष्कासन हुआ और दोनों ने ही सपा ज्वाइन कर ली। विधायक मुख्तार अंसारी को पार्टी भविष्य में चुनाव न लड़ाने का एलान कर चुकी है। उनकेभाई और भतीजे ने सपा का दामन थामा तो मायावती ने यह कदम उठाया। विधायक सुखदेव राजभर का निधन हो चुका है। ऐसे में बसपा के बसपा के पास बस चार विधायक ही रह गए हैं।

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