बदले – बदले से होंगे 2023 में पोहरी के राजनैतिक समीकरण

पोहरी विधानसभा में राजनीति तो 2018 में ही बदल गई थी जब कांग्रेस ने दस वर्ष के भाजपा विधायक पीछे धकेल सीट हथिया ली थी लेकिन डेढ़ साल बाद ही भारतीय जनता पार्टी ने न केवल सीट हथियाई बल्कि कांग्रेस से उनका विधायक ही अपने पाले में बिठा लिया और उनके सहयोग से सूबे में एकबार फिर शिव का राज स्थापित हो गया । इस दल बदल से भले ही भाजपा और तत्कालीन कांग्रेस विधायक को फायदा हुआ हो लेकिन भाजपा के निवर्तमान विधायक, पूर्व विधायक सहित भविष्य के दावेदार अपने राजनैतिक भविष्य को समाप्त होता देख रहे थे और अब भी देख रहे हैं ।
दरअसल कांग्रेस से भाजपा में आए सिंधियाई नेता को भाजपा ने महाराज से किए वादे के मुताबिक सत्ता का हिस्सा बनाकर राज्यमंत्री बना दिया, अब आने वाले 2023 के चुनाव में वही अघोषित उम्मीदवार हैं, ऐसे में दो पूर्व विधायक ( वर्तमान राज्यमंत्री दर्जा ) सहित एक भाजपा नेत्री को और इंतजार करना पड़ सकता है । राजनीतिक पंडितों का अनुमान है कि वर्तमान विधायक और एक पूर्व विधायक को टिकिट के लिए अदला बदला जा सकता है यानी पूर्व विधायक को टिकिट तो वर्तमान विधायक को आयोग में जगह देकर मान मनोव्वल करने का प्रयास होगा, ऐसे में वर्तमान विधायक क्या फैसला लेंगे ये उनके महाराज तय करेंगे । साथ ही राजनीतिक गलियारों में चर्चा के साथ कयास हैं कि प्रमुख दावेदारों में से किसी एक का भाजपा से टिकिट न मिलने की दशा में कांग्रेस का हाथ थामने की भी सुगबुगाहट है तो वहीं लंबे समय से टिकिट के लिए प्रयासरत और अपनी राजनीतिक बिसात बिछाने के लिए पोहरी विधानसभा की गली गली खाक छानने वाले दावेदार के निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने की भी खबर चर्चा में है ।

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