PLACE-YOUR-ADVERT-HERE
add-banner
IMG-20231202-WA0031
IMG_20220718_112253
IMG-20250516-WA0020
IMG-20250516-WA0017
ताजा ख़बरेंदेशधर्मराजनीति

क्या हो ? , राजनीति का धर्म या धर्म की राजनीति

इंजी. वीरबल सिंह
आजकल देश में दो ही मुद्दे चर्चित हैं, एक तो राजनीति और दूसरा धर्म । राजनीति और धर्म का रिश्ता सदियों पुराना है । राजनीति हमेशा ही अपने स्वार्थ के लिए धर्म को सीढ़ी बनाती रही है । अधार्मिक लोग राजनीतिज्ञ बनते रहे और धर्म के नाम पर अनाचार-अत्याचार करते रहे । ऐसे में ये जानना जरूरी है कि क्या वाकई राजनीति से धर्म को अलग किया जाय या राजनीति हमेशा धर्मयुक्त रहनी चाहिए ।
धर्म वह कृत्य या कार्य है जिनसे मानवजाति का कल्याण हो सके । ऐसा काम जिससे संपूर्ण मानवजाति का कल्याण हो और साथ ही किसी दूसरे के हितों को ठेस भी न पहुंचे। राजनीति में यों तो धर्म का स्थान ही नहीं बनता लेकिन फिर भी अगर राजनीति होनी चाहिए तो हम कहते हैं वह धार्मिक होनी चाहिए यानि सबके कल्याण की सोच के साथ।. जब तक नेताओं को धर्म का सही अर्थ नहीं पता होगा तब तक वह इसी तरह तथाकथित धर्म के अनुयायी बने हुए राजनीति की राह पर उन्मुक्त घूमते रहेंगे ।

No Slide Found In Slider.


धर्म का कार्य है लोगों को सदाचारी और प्रेममय बनाना और राजनीति का उद्देश्य है लोगों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुये उनके हित में काम करना । जब धर्म और राजनीति साथ-साथ नहीं चलते, तब हमें भ्रष्ट राजनीतिज्ञ और कपटी धार्मिक नेता मिलते हैं । एक धार्मिक व्यक्ति, जो सदाचारी और स्नेही है, अवश्य ही जनता के हित का ध्यान रखेगा और एक सच्चा राजनीतिज्ञ बनेगा एक सच्चा राजनीतिज्ञ केवल सदाचारी और स्नेही ही हो सकता है, इसीलिए उसे धार्मिक होना ही है। परन्तु राजनीतिज्ञ को इतना भी धार्मिक न होना है जो दूसरे धर्मों की स्वतन्त्रता और उनकी विधियों पर बंदिश लगाये। राजनीति और धर्म दोनों ही हर वर्ग के जीवन को प्रभावित करने वाले विषय है जो कभी भी एक दूजे से अलग न हो सकते मगर राजनीति की दशा और दिशा के बारे में सोच बदलने की आवश्यकता है। इस समय धर्म की राजनीति को लेकर तमाम सवाल, आरोप-प्रत्यारोप उठ रहे हैं । एक राजनीतिज्ञ को धर्मिक होना ज़रूरी है। धर्म के बिना समर्थ और सार्थक राजनीति नहीं हो सकती ।.हमारे राजनीतिज्ञ को राजनीति के धर्म का पालन करना होगा ऐसा न हो की धर्म की राजनीती की जाये ।

धर्म गुरुओं और कथावाचकों सहित तमाम तथाकथित मठाधीशों ने अब राजनीति में रुचि लेना शुरू कर दिया है । धर्म गुरुओं का काम शासक को राह दिखाने तक था लेकिन आजकल इसे राजा बनाना है और इसे नहीं, अब यह तय करने वाले धर्म के ठेकेदार बन गए हैं । धर्म की आड़ में आजकल तथाकथित धर्म गुरुओं, संतो के द्वारा सत्ता की लोलुपता और दुराचार जैसे कृत्यों की मानों बाढ़ सी आ गई है, एक जाति और धर्म विशेष के वोट बैंक की राजनीति के लिए सरकारों द्वारा अब उन तथाकथित संतों को वीआईपी सुविधाएं मुहैया कराने का काम किया जाने लगा है । वातानुकूलित आवास सहित गाड़ी, अकूत धन संग्रह उन संतों का काम हो गया है । आज कितने ही संत दुराचार करने के बाद सलाखों के पीछे हैं और सरकारें आज भी उनके चरणों में नतमस्तक हैं, जेल से रिहा होने के बाद उनको बेहतरीन सुरक्षा व्यवस्था मुहैया कराने का का काम कर रही हैं । धर्म का चोला ओढ़कर तथाकथित धर्म गुरु और संत अब अनैतिक कार्यों में लिप्त होते जा रहे हैं और राजनैतिक महत्वाकांक्षा के कारण सरकारें उन्हें सरंक्षण प्रदान कर रही हैं ।
लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं ।

Chief Editor JKA

PicsArt_10-26-02.06.05
FB_IMG_1657898474749
IMG-20250308-WA0007

Related Articles

Back to top button