सर्वे में सबकुछ ठीक नहीं रहा तो भाजपा पोहरी से इनको देगी टिकिट ?

पोहरी : मध्यप्रदेश 2023 के विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी एक्शन मूड में दिखाई दे रही है, अपनी स्थिति को वो बेहतरीन तरीके से भाँप चुकी है तभी तो एक तरफ युवाओं को लुभाने के लिए करीब एक लाख पदों पर भर्ती परीक्षा आयोजित कराने का आश्वासन दिया जा रहा है, ये तो आने वाला वक़्त ही बता पाएगा कि इनमें से कितने पदों पर सही समय मे जॉइनिंग मिलेगी । वहीं दूसरी तरफ अपने विधायकों और मंत्रियों के कार्यकाल का लेखा जोखा पता कर हिसाब लगाया जा रहा है और जिन मंत्रियों के पैरों के नीचे से जमीन खिसक रही है उन पर गाज गिराने की तैयारी भी चल रही है । जानकारी के मुताबिक बीते दिनों हुई मुख्यमंत्री निवास पर बैठक को भले ही स्नेह भोज का नाम दिया गया हो लेकिन मुख्यमंत्री और संगठन की ओर से साफ तौर पर उन मंत्रियों को सचेत कर दिया गया है जिनकी स्थिति नाजुक है और इनमें ज्यादातर नाम सिंधियाई नेताओं के हैं उनमें एक नाम पोहरी के वर्तमान विधायक का भी बताया जा रहा है। क्षेत्र की जनता राज्यमंत्री और अपने विधायक से कुछ खास संतुष्ट दिखाई नहीं दे रही है ऐसे में यदि 2018 की तरह सर्वे हुआ तो सिटींग एमएलए का टिकिट कटना तय है तब सवाल खड़ा होता है कि फिर टिकिट किसे मिलेगा । 2018 में तमाम अखबारों की खबरों पर गौर किया जाए तो तब के विधायक और वर्तमान राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त का नाम तीसरे नम्बर पर पहुंचने वाले लोगों में शामिल था लेकिन पार्टी ने जोखिम उठाकर उन्ही पर भरोसा किया और नतीजे सबके सामने थे लेकिन भाजपा इस बार कोई जोखिम नहीं उठाना चाहती है।
तो इन्हें मिल सकता है टिकिट
पोहरी को लेकर किबदन्ति है कि यहाँ चुनाव विकास के मुद्दे पर नहीं बल्कि जातिगत आधार पर होते हैं तभी तो अभी तक हुए चुनावों में यहाँ धाकड़ और ब्राह्मण समुदाय के व्यक्ति ही विधायक बने । 2018 में धाकड़ वनाम धाकड़ की स्थिति ऐसी बनी कि पोहरी में विकास की भागीरथी लाने वाले तत्कालीन विधायक प्रहलाद भारती तीसरे नम्बर पर पहुंच गए और एक बार फिर 2023 में धाकड़ वनाम धाकड़ की स्थिति बन सकती है । सर्वे को सर्वोपरि भाजपा ने माना तो वर्तमान विधायक सुरेश राठखेड़ा का टिकिट काटना तय है । तब पार्टी से पूर्व विधायक प्रहलाद भारती और भूतपूर्व विधायक नरेंद्र बिरथरे दोनों ही राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त के साथ समाजसेवा से राजनीति में कदम रखने वाली डॉ. सलोनी सिंह धाकड़ प्रबल दावेदार की सूची में शामिल हैं । राजनैतिक जानकारों का मानना है कि दोनों ही पूर्व विधायक पहले चुनाव हार चुके हैं और उनकी बगावत को भांपते हुए डैमेज कंट्रोल के लिए ही उन्हें राज्यमंत्री दर्जा से नवाजा गया है, ऐसे में उनको टिकिट मिलेगा उसकी संभावना कम ही है । भाजपा के निर्णय तात्कालिक और चौंकाने वाले भी होते हैं तब की स्थिति में डॉ सलोनी सिंह धाकड़ का नाम सबसे ऊपर माना जा रहा है । डॉ सलोनी सिंह लंबे समय से क्षेत्र में जनसेवा के माध्यम से अपनी राजनैतिक बिसात बिछा चुकी हैं उन्हें सभी वरिष्ठ नेतृत्व के खेमे के माना जाता है यानी कि गुटबाजी की राजनीति से डॉ सलोनी सिंह का कोई सरोकार नहीं है, स्वच्छ और निर्विवाद छवि वाली श्रीमती धाकड़ महिला नेत्री के रूप में एकमात्र पार्टी कार्यकर्ता हैं जो लंबे समय से पार्टी का झंडा उठाकर कार्य कर रहीं हैं

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