अब तो भाजपा फिर कहने लगी “माफ करो महाराज”

2018 में आम विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के निशाने पर तत्कालीन कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया थे और उन्होंने कांग्रेस से ज्यादा सिंधिया को ही टारगेट किया था ,तभी तो भाजपा ने नारा दिया था कि “माफ करो महाराज-अपने नेता शिवराज” । समय को करवट बदलते देर नहीं लगी और जिस महाराज को भाजपा पानी पी पीकर कोसती थी उन्ही की कृपा से सूबे में चौथी बार शिव का राज है । सिंधिया ने शिव को राज क्या दिया वे अब भाजपा के भी महाराज हो गए और ऐसे हुए कि महाराज उर्फ ज्योतिरादित्य सिंधिया धूमधाम से साथ बीजेपी में आए थे। धूमधाम भी ऐसी कि बीजेपी में जिधर नजर दौड़ाई, उधर धूम हो गई। साथ आए सारे प्रवासी विधायकों को फिर टिकट दिलवा दिए। जो जीत गए, उनमें से ज्यादातर मंत्रित्व को प्राप्त हो गए और जो हार गए, वो निगमों में नहा लिए। अब लग रहा है इस स्नान-ध्यान पर विराम का वक्त आ गया है। महापौर और पार्षदी के लिए जिस हिसाब से महाराज को तोल-बांट लगाकर इक्का-दुक्का टिकट दिए गए, उसके बाद इस विराम पर पूर्ण विराम सा लगता दिख रहा है। इंदौर-भोपाल में तो महाराज के बंदों की सूची किसी किराना सूची से भी लंबी थी, लेकिन पार्टी ने उसे काटकर एटीएम की छोटी सी पर्ची बना दिया। एक यहां ले लो और एक वहां ले लो..बस दो-तीन टिकट ठीक हैं। महाराज ने भी वक्त की नजाकत को भांपकर फिलहाल शांति बनाए रखी है। यह तय है कि बात दिल्ली तलक जाएगी, लेकिन वहां से कितनी मन की होकर लौटेगी, इसके लिए़ इंतजार करना पड़ेगा। अभी दिल्ली के लिए मराठा सरकार से ज्यादा महाराष्ट्र सरकार जरूरी है।


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