प्रसव पूर्व भ्रूण परीक्षण करते पाए जाने पर अल्ट्रासोनोग्राफी केन्द्रों के विरूद्ध होगी कार्यवाही – कलेक्टर /- Datia News

प्रसव पूर्व कन्या भ्रूण परीक्षण पर रोक लगाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा टीम गठित कर जिले में संचालित अल्ट्रासोनोग्राफी केन्द्रों का आकस्मिक निरीक्षण किया जायेगा। प्रसव पूर्व भ्रूण परीक्षण करते पाए जाने पर संबंधित अल्ट्रासोनोग्राफी केन्द्रों के विरूद्ध कार्यवाही की जायेगी।
उक्ताशय की जानकारी कलेक्टर श्री संजय कुमार ने शक्ति माँ नवाचार के तहत् बालिकाओं एवं महिलाओं की समस्याओं के निराकरण एवं शासन की विभिन्न योजनाओं के तहत् लाभान्वित किए जाने के संबंध में आयोजित बैठक में दी।
न्यू कलेक्ट्रेट के सभाकक्ष मंे आयोजित बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री कमलेश भार्गव अतिरिक्त पलिस अधीक्षक श्री कमल मौर्य सहित संबंधित विभागों के जिला अधिकारी तथा शासकीय हाई स्कूल एवं हायर सेकेण्ड्री स्कूलों के प्राचार्य आदि उपस्थित थे।
कलेक्टर श्री कुमार ने शासन की शक्ति माँ योजना के संबंध में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि महिलाओं एवं बालिकाओं की समस्याओं का निदान कर शासन की विभिन्न योजनाओं के तहत् उन्हें लाभान्वित करना है। कलेक्टर ने कहा कि देश में 1 हजार बालकों पर 931 बालिकायें है जबकि दतिया जिले में 1 हजार बालकों पर 873 बालिकायें है। जो एक चिन्ता का विषय है। समाज को बालिकाओं के प्रति अपनी सोच भी बदलनी होगी और लोगों को बालक एवं बालिकाओं के प्रति किसी भी प्रकार का भेद नरी रखें। उन्होंने कहा कि हमें ऐसे प्रयास करने है कि बालिकाओं की संख्या में कमी नही ंआए। इसके लिए शासन द्वारा संचालित बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ योजनाओं की जानकारी भी समाज के बीच में जाकर देनी होगी।
कलेक्टर ने कहा कि बालिकाओं की संख्या कम होने का मुख्य कारण प्रसव पूर्व भ्रूण परीक्षण भी है। इसके लिए जिला प्रशासन द्वारा टीम गठित कर जिले में स्थित सभी अल्ट्रासोनीग्राफी सेंटरों का आकस्मिक निरीक्षण भी किया जायेगा। भ्रूण परीक्षण की सूचना देने वालों को भी शासन द्वारा पुरस्कार स्वरूप राशि प्रदाय की जायेगी। कलेक्टर ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि विभिन्न आयु वर्ग की महिलाओं की समस्याओं को लेकर उनके निदान हेतु रणनीति तैयार करें। उन्होंने कहा कि बालिकाओं की समस्याओं के निराकरण हेतु जिले में शुरू की गई ”बेटी की पेटी” सभी शिक्षण संस्थाओं, छात्रावासों, कोचिंग सेंटरों पर स्थापित करने महिला एवं बाल विकास के अधिकारी को निर्देश दिए। उन्होंने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को निर्देश दिए कि महिला एवं बाल विकास विभाग से समन्वयकर यह सुनिश्चित करें कि जिले में शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव हो। जिससे प्रसूता को प्रोत्साहन राशि का भी लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केन्द्र की सहायिका एवं कार्यकर्ताओं को आत्म सुरक्षा का प्रशिक्षण प्रदाय किया जाये।

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