साहित्य सृजन से ही बड़े-बड़े चरित्र सामने आए हैं – उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. यादव
उच्च शिक्षा मंत्री के मुख्य आतिथ्य में हुआ अंतर्राष्ट्रीय ग्वालियर साहित्य उत्सव का शुभारंभ

ग्वालियर : साहित्य सृजन से ही बड़े-बड़े और महान चरित्र सामने आए हैं। साहित्य की रचना नहीं होती तो बहुत से महान चरित्रों से हम अनभिज्ञ रह जाते। साहित्य के रूप में गीता प्रकट होती है, जो सही जीवन के लिए चेतना जागृत करती है। इस आशय के विचार उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ने व्यक्त किए। डॉ. यादव “अंतराष्ट्रीय ग्वालियर साहित्य उत्सव” के उदघाटन सत्र को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
शनिवार को यहाँ भारतीय पर्यटन एवं यात्रा प्रबंधन संस्थान के सभागार में आयोजित हुए ग्वालियर साहित्य उत्सव के उदघाटन सत्र में मध्यप्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मण्डल के अध्यक्ष श्री आशुतोष तिवारी, अखिल भारतीय साहित्य परिषद के राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्रीयुत श्रीधर पराडकर व उद्भव संस्था के अध्यक्ष डॉ. केशव पाण्डेय, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. परवीन सोमानी तथा आयोजन से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारी मंचासीन थे। ग्वालियर साहित्य उत्सव का आयोजन संस्कृति एवं क्रीड़ा के क्षेत्र से जुड़ी संस्था उद्भव एवं सेंट्रल अकादमी स्कूल द्वारा किया जा रहा है।
उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ने बाल्मीक रामायण, महाभारत व गीता जैसे ग्रंथों का उदाहरण देते हुए कहा कि इन ग्रंथों ने समाज को सदाचरण और उच्च आदर्शों का पाठ पढ़ाकर नई दिशा दी। उन्होंने कहा साहित्य ऐसी विधा है जो समाज की विसंगतियों को दूर करने की ताकत रखती है। डॉ. यादव ने ग्वालियर में साहित्य उत्सव के आयोजन की सराहना की। साथ ही साहित्य की इस अमृत यात्रा में मध्यप्रदेश सरकार की ओर से देश और दुनिया से आए साहित्यकारों का स्वागत किया। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह चार दिवसीय साहित्य उत्सव अच्छे साहित्य के सृजन में अहम भूमिका निभायेगा।
गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मण्डल के अध्यक्ष श्री आशुतोष तिवारी ने कहा कि हमें भारतीय संस्कृति और अच्छी परंपराएँ बचाना हैं तो साहित्य से जुड़ा रहना होगा। संस्कृति एवं संस्कारों को संरक्षित करने में साहित्य की बहुत बड़ी भूमिका है। उन्होंने कहा इस साहित्य उत्सव का आयोजन ग्वालियर – चंबल अंचल की सकारात्मक छवि के निर्माण में यादगार साबित होगा।
उदघाटन सत्र को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय साहित्य परिषद के राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्रीयुत श्रीधर पराडकर ने कहा कि साहित्य मनुष्य को मनुष्य बनाता है। हमारी संस्कृति में साहित्य ने मनुष्य को नर से नारायण बनाने का काम किया है। साहित्य ने इस संसार को भगवान श्रीराम व श्रीकृष्ण से लेकर चाणक्य तथा अन्य महान चरित्र समाज को दिए हैं। साहित्य के शाश्वत मूल्य कभी नहीं बदलते, साहित्य से हमें यही ग्रहण करना है। श्री पराडकर ने कहा कि ग्वालियर के साहित्यिक गौरव व परंपरा को विश्व पटल पर सबसे सामने लाने के उद्देश्य से यह आयोजन किया गया है।
आरंभ में अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर साहित्य उत्सव का शुभारंभ किया। इस अवसर पर सेंट्रल अकादमी के बच्चों ने सरस्वती वंदना, स्वागत गीत एवं मनोहारी संगीतमय नृत्य प्रस्तुत किया। स्वागत उदबोधन सेंट्रल स्कूल अकादमी के डॉ. अरविंद सिंह जादौन ने दिया। उद्भव संस्था के अध्यक्ष डॉ. पाण्डेय ने संस्था का परिचय एवं सचिव श्री दीपक तोमर ने विभिन्न गतिविधियों से अवगत कराया। कार्यक्रम का सांचालन सुश्री मिताली तोमर ने एवं आभार प्रदर्शन श्री विनय झालानी ने किया।

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