इमरती का दर्द : किसने हराया जनता ने या किसी अपने ने ..?

ग्वालियर : शुद्ध देशी अंदाज वाली ग्वालियर अंचल की सिंधिया की निष्ठावान समर्थक सदैव जिह्वा पर मिठास रखने वाली इमरती आजकल कुछ ज्यादा ही चिड़चिड़ी हो गई हैं । इमरती देवी आरक्षित सीट डबरा से लगातार बढ़ते मार्जिन से तीन बार विधायक बनी लेकिन अपने राजनैतिक आका सिंधिया के कहने पर महिला बाल विकास मंत्री का पद ठुकराकर कांग्रेस हाथ झटककर भगवा रंग की पट्टी गले में डाल ली, वही मंत्रालय भाजपा सरकार में भी मिला लेकिन चुनाव हार गई और विधायकी से भी हाथ धो बैठी । हार का दर्द ऐसा कि इमारती देवी कभी मंच से डबरा को कांग्रेस का गढ़ बताती हैं तो कभी अपने महाराज से गले मिल अपनी हार का दुखड़ा रो देती हैं । लगातार बढ़ते मार्जिन से चुनाव जीतने वाली इमरती अपनी हार का रहस्य जानना चाहती हैं, इस समय प्रदेश में बागेश्वर धाम और पंडोखर सरकार के संत गूढ़ रहस्य बता देते हैं और उन्ही पंडोखर सरकार से इमरती जब मिली तो उन्होंने यही पूछा कि महाराज मैं चुनाव कैसे हारी …? सब कुछ बता देने वाले पंडोखर सरकार सिर्फ इतना ही जबाव दे पाए कि चुनाव भारतीय जनता पार्टी के नेता ने हराया है अब सवाल है कि भाजपा में ऐसा विभीषण कौन है जिसने कांग्रेस से मिलकर इमरती को इतना दुःख दर्द दे दिया है ।
कुछ ज्यादा ही चिड़चिड़ी हो गई हैं इमरती
सदैव ही मिठास भरे अंदाज में बात करने वाली और ठेठ देशी भाषा में संवाद करने वाली इमरती आखिरकार इतनी चिड़चिड़ी कैसे हो गई है, वो आए दिन मंच से अपनी ही सरकार के प्रशासन को चुनौती देती सुनाई देती हैं तो कभी थाना टीआई को दलाल कहने से परहेज भी नहीं करती और तो और दलाल की संज्ञा वाले टीआई को एक नेता की सह पर काम करने वाला भी बताती हैं । बड़ी सहजता से मीडिया से मुखातिब होने वाली आजकल इमरती मीडिया पर भी झल्ला पड़ती हैं और अपने बयानों पर मीडिया को जबाव देने से बच जाती हैं । कहने वाले कहते हैं कि भाजपा रहते इमरती डबरा में उतनी नहीं हो सकती जितनी कांग्रेस में हुआ करती थीं और 2023 चिंता ही है जो उनको चिड़चिड़ापन दे रही है साथ ही कुछ लोग इसे प्रेशर पॉलिटिक्स का भी नाम दे रहे हैं ।

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