विजयपुर : सीता और बाबू दोनों ही राम के खिलाफ, बोले कांग्रेस में होंगे शामिल ?

राजनीतिक : सूबे की सियासत का रंग कुछ अलग ही है, पूर्ण बहुमत में होने के बाद भी प्रदेश में भाजपा को जोड़ तोड़ की राजनीति करनी पड़ रही है और वो मजबूती नहीं बल्कि मजबूरी में शर्तों में बंधे होकर , इसका ताजा उदाहरण विजयपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक रामनिवास रावत का है । मुरैना लोकसभा सीट पर जीत हासिल करने के लिए भाजपा ने कई कांग्रेसियों को भाजपा में शामिल कराया था जिनमें सबसे बड़ा नाम कांग्रेस के छः बार के विधायक और पूर्व मंत्री, कार्यकारी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रामनिवास रावत का है । रामनिवास रावत ने प्रदेश की मोहन सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाए जाने की शर्त पर भाजपा का दामन थामा था और भाजपा ने उन्हें हाल ही मंत्री पद की शपथ भी दिलाई है लिहाजा आगामी छः माह में उपचुनाव होना तय है और रामनिवास रावत भाजपा के अघोषित उम्मीदवार भी लेकिन रामनिवास की मुश्किलें भाजपा के ही दो पूर्व विधायकों ने खड़ी कर दी है ।
बाबूलाल मेवरा और सीताराम आदिवासी ने खोला मोर्चा
विजयपुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के पूर्व विधायक सीताराम आदिवासी ने कहा है कि उपचुनाव में रामनिवास रावत को नहीं बल्कि मुझे टिकिट दिया जाना चाहिए और मैं इसका प्रबल दावेदार भी हूं क्योंकि इस विधानसभा में रावत समाज के 15 हजार तो मेरे समाज ( आदिवासी समाज ) के 65 हजार वोट हैं । उन्होंने आगे कहा कि यदि मुझे टिकिट नहीं दिया गया तो मैं कांग्रेस में चला जाऊंगा जिसका खामियाजा भाजपा को उठाना पड़ेगा ।
इसके अलावा 2023 में भाजपा के टिकिट पर चुनाव लडे बाबूलाल मेवरा ने भी अपने बगावती सुर तेज कर दिए हैं , बाबूलाल भाजपा से विधायक भी रहे हैं और राज्यमंत्री का दर्जा भी और इतना ही नहीं वे भाजपा के बाद कांग्रेस और बसपा में शामिल हो चुके लेकिन विधानसभा चुनाव से ठीक पहले टिकिट की शर्त पर भाजपा में शामिल हुए थे और 2023 में रामनिवास रावत से चुनाव हार गए । उन्होंने एक अखबार से बातचीत के दौरान कहा कि मैं जनसंघ के समय से भाजपा का कार्यकर्ता हूं ,भाजपा व्यक्ति आधारित पार्टी नहीं है यहां संगठन सर्वोपरि है और मैं प्रबल दावेदार हूं । उन्होंने कहा कि 2023 में अपनों की भीतरघात के चलते चुनाव हार गया था लेकिन अब चुनाव जीतूंगा । पूछे जाने पर कि क्या टिकिट न मिलने की स्थिति आप कांग्रेस में शामिल होंगे तो इस सवाल पर बोले कि कांग्रेसियों ने उनसे संपर्क किया ।
कांग्रेस से मुकेश मल्होत्रा या कोई और…
विजयपुर में कांग्रेस का गढ़ था और रामनिवास रावत वहां के कर्ताधर्ता , ऐसे में कांग्रेस की राह भी आसान नहीं है लेकिन 2023 में निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लडे मुकेश मल्होत्रा ने लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस का हाथ थामा था इसलिए राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि मुकेश मल्होत्रा उपचुनाव में कांग्रेस का चेहरा हो सकते हैं इसके अलावा भाजपा के पूर्व विधायकों ने यदि बगावती तेवरों के चलते कांग्रेस का हाथ थामा तो कांग्रेस उनमें से किसी को उम्मीदवार बना सकती है।

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