विजयपुर का चुनाव विकास और सबक के बीच उलझा , भाजपा की राह मुश्किल
सत्ता और संगठन के साथ मंत्री पद के सामने पूर्व भाजपाई आदिवासी नेता

विजयपुर का चुनाव भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच न होकर अब जनता खुद लड़ रही है, जनता चुनाव में सिर्फ दो वजह पर अपना निर्णय ले रही है। कहने को भले ही दोनों ही पार्टी एड़ी चोटी का जोर लगा रही हैं, बड़े बड़े नेता गांव गलियों की खाक छान रही हैं लेकर जनता अपना मन बना चुकी है और जनता के मन ने भारतीय जनता पार्टी की नींद उड़ा दी है । एक तरफ जनता विजयपुर का विकास देखना चाहती है ,उसे उम्मीद है कि भाजपा प्रत्याशी रामनिवास रावत सत्ता में वन मंत्री हैं और मंत्री पद पर रहते हुए वे क्षेत्र का विकास करेंगे और दूसरी तरह एक तबका ऐसा भी है जो दल बदल कर भाजपा में शामिल होने वाले रामनिवास रावत को सबका सीखने का मन बना रही है, दबी जुबान ही सही जनता का कहना है कि रामनिवास रावत विजयपुर विधानसभा सीट से छह बार विधायक रहे हैं और एक बार मध्यप्रदेश सरकार में मंत्री भी रहे लेकिन तब उनको विजयपुर के विकास की याद क्यों नहीं आई। दूसरी तरफ कांग्रेस के मुकेश मल्होत्रा भी दल बदलकर कांग्रेस में शामिल हुए हैं, रामनिवास के भाजपाई हो जाने से कांग्रेस के पास संगठन और कार्यकर्ता की कमी है दूसरा चुनाव में खर्चा करने के लिए धनबल भी कम है लेकिन आदिवासी बाहुल्य सीट पर आदिवासी वोट बैंक का शत प्रतिशत कांग्रेस के साथ दिखाई दे रहा है ऐसे में चुनावी शतरंज में कौन बाजी मारेगा ये कहना जल्दबाजी होगा ।

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