भोपाल में गूंजा “एक प्रदेश, एक आरक्षण” का नारा, सीएम हाउस घेराव के लिए निकले रजक समाज को पुलिस ने रोका

भोपाल। राजधानी भोपाल में गुरुवार को संयुक्त मोर्चा रजक समाज ने अपनी लंबित मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन किया। “एक प्रदेश, एक समुदाय, एक आरक्षण” का नारा लगाते हुए रजक/धोबी समाज को अनुसूचित जाति में शामिल करने की मांग को लेकर प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री निवास के घेराव के लिए आगे बढ़े, तो पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोक लिया। इसके बाद प्रदर्शनकारी वहीं बैठ गए और विरोध दर्ज कराया।
आमरण अनशन घोषणा
समाज के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि जब तक मुख्यमंत्री से सीधी मुलाकात नहीं होती और ठोस आश्वासन नहीं मिलता, आंदोलन जारी रहेगा। कुछ नेताओं ने आमरण अनशन की भी घोषणा की।
संयुक्त मोर्चा के प्रदेश संयोजक कैलाश नाहर ने बताया कि वर्तमान में रजक/धोबी जाति को केवल भोपाल, सीहोर और रायसेन जिलों में अनुसूचित जाति का दर्जा प्राप्त है, जबकि प्रदेश के अन्य जिलों में यही जाति पिछड़ा वर्ग में अधिसूचित है। एक ही राज्य में एक ही समुदाय के लिए अलग-अलग आरक्षण व्यवस्था लागू होना सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। विवाह के बाद जिलों के आधार पर बच्चों की श्रेणी बदल जाना प्रशासनिक और सामाजिक विसंगति पैदा करता है, जिसे समाप्त किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि 14 जुलाई 2006 को मध्यप्रदेश शासन द्वारा रजक/धोबी समाज को पूरे प्रदेश में अनुसूचित जाति में शामिल करने का प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा गया था, लेकिन आदिम जाति अनुसंधान संस्थान की टिप्पणी के आधार पर प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।
अनुसूचित जाति में शामिल करने की मांग
मुख्यमंत्री को दिए ज्ञापन में सामाजिक न्याय और समान अवसर की भावना को ध्यान में रखते हुए ऐतिहासिक निर्णय लेने तथा केंद्र सरकार को पुनः प्रस्ताव भेजकर रजक/धोबी समाज को संपूर्ण मध्यप्रदेश में अनुसूचित जाति में शामिल करने की मांग की गई है। प्रदेश संयोजक मोनू लक्ष्मण ने कहा कि समाज अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेगा।

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