कागजों में खुदे तीन तालाब,ग्रामीणों की शिकायत पर CEO दीपक धाकड़ पहुंचे नेहरखेड़ा
करीब 9 लाख की रिकवरी से पंचायत में हड़कंप

विजयपुर। ग्राम पंचायत नेहरखेड़ा में विकास कार्यों को लेकर ग्रामीणों की शिकायत ने पंचायत के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायत के बाद विजयपुर जनपद पंचायत के CEO दीपक धाकड़ अपनी टीम के साथ खुद मौके पर पहुंचे और पंचायत में दर्ज विकास कार्यों का भौतिक सत्यापन किया।
जांच के दौरान सबसे चौंकाने वाली स्थिति तीन तालाबों को लेकर सामने आने की बात कही जा रही है। सरकारी रिकॉर्ड में जिन तालाबों का निर्माण पूर्ण बताया गया, मौके पर उनका निर्माण दिखाई नहीं दिया। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब तालाब धरातल पर बने ही नहीं तो उनके निर्माण और मजदूरी के नाम पर राशि का भुगतान आखिर किस आधार पर किया गया?
शिकायत को गंभीरता से लिया, रिकॉर्ड छोड़कर मौके पर पहुंचे CEO
ग्रामीणों की शिकायत को महज कागजी कार्रवाई तक सीमित रखने के बजाय CEO दीपक धाकड़ ने स्वयं टीम के साथ मौके पर पहुंचकर कार्यों की वास्तविक स्थिति देखी। अधिकारियों ने रिकॉर्ड में दर्ज कार्यों और मौके पर मौजूद स्थिति के बीच मिलान किया। इस कार्रवाई से यह संदेश भी गया कि पंचायत के विकास कार्यों का मूल्यांकन केवल फाइलों और कागजों के आधार पर नहीं, बल्कि धरातल पर हुए वास्तविक निर्माण के आधार पर किया जाएगा।
करीब 9 लाख की रिकवरी ने बढ़ाई हलचल
पंचायत में सामने आई कथित अनियमितताओं के बाद करीब 9 लाख रुपये की रिकवरी की कार्रवाई की बात सामने आई है। रिकवरी की कार्रवाई के बाद पंचायत स्तर पर हलचल तेज हो गई है। इसी बीच महिला सरपंच की ओर से CEO दीपक धाकड़ पर कमीशन मांगने के आरोप लगाए जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और फिलहाल इनके समर्थन में कोई ठोस सार्वजनिक साक्ष्य सामने नहीं आया है। ऐसे में पूरे मामले में अब आरोपों से ज्यादा जरूरी सरकारी रिकॉर्ड और मौके पर मौजूद वास्तविक स्थिति की निष्पक्ष जांच मानी जा रही है।
तीन तालाबों ने खड़े किए कई बड़े सवाल
मामले का सबसे गंभीर पहलू तीन तालाबों से जुड़ा बताया जा रहा है। रिकॉर्ड में इनके निर्माण को पूर्ण दर्शाया गया, लेकिन मौके पर निर्माण नहीं मिलने की बात सामने आई है। यदि विभागीय जांच में यह पुष्टि होती है कि तालाबों का वास्तविक निर्माण नहीं हुआ और इसके बावजूद मजदूरी अथवा निर्माण मद में सरकारी राशि का भुगतान किया गया, तो यह सरकारी धन के उपयोग को लेकर गंभीर मामला हो सकता है। वहीं, जिन स्थानों पर तालाब निर्माण दर्शाया गया है, उनमें कुछ जमीन वन विभाग अथवा तहसील से संबंधित विवादित भूमि होने की बात भी सामने आ रही है। इसकी वास्तविक स्थिति राजस्व एवं संबंधित विभाग के रिकॉर्ड की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
अब दूसरे विकास कार्यों पर भी उठे सवाल
तीन तालाबों को लेकर उठे सवालों के बाद ग्रामीणों ने पंचायत के अन्य विकास कार्यों की भी मौके पर जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पंचायत में सड़क, नाली, निर्माण, जल संरक्षण और अन्य विकास कार्यों का भी रिकॉर्ड के आधार पर भौतिक सत्यापन कराया जाए तो तस्वीर और साफ हो सकती है।
अब जांच पर टिकी निगाहें
नेहरखेड़ा पंचायत का मामला अब केवल एक पंचायत के तीन तालाबों तक सीमित नहीं रह गया है। करीब 9 लाख रुपये की रिकवरी और उसके बाद सामने आए आरोपों ने पूरे मामले को चर्चा में ला दिया है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग की विस्तृत जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं। क्या वाकई कागजों में पूर्ण बताए गए तालाब धरातल पर नहीं बने? सरकारी राशि का भुगतान किस आधार पर हुआ? और CEO पर लगाए गए कमीशन के आरोपों में कितनी सच्चाई है?

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