कवि कुमार विश्वास होंगे सपा में शामिल, मिला ऑफर

कवि, राजनेता डॉ कुमार विश्वास जबसे आम आदमी पार्टी से अनबन कर बैठे हैं तब से लेकर अब तक भाजपा और कांग्रेस में जाने को लेकर अटकलें लगाई जाती रही हैं । लेकिन अभी हाल ही में कवि कुमार विश्वास को लेकर समाजवादी पार्टी में शामिल होने का आमंत्रण मिला है तो क्या कुमार विश्वास अब समाजवादी पार्टी का दामन थाम लेंगे ,इस बात को लेकर मीडिया और राजनीतिक गलियारों में कयासों का दौर जारी है ।
दरअसल लखनऊ में मंगलवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में सपा महासचिव प्रोफेसर राम गोपाल यादव की पुस्तक ‘राजनीति के उस पार’ का विमोचन समारोह आयोजित किया गया। इसमें मुलायम-अखिलेश समेत कई दलों के नेता शामिल हुए। समारोह में कवि कुमार विश्वास ने भी शिरकत की और लोगों की नजरें उन्हीं पर टिकी रहीं। मौके की नजाकत को भांपते हुए मुलायम सिंह ने कुमार विश्वास को सपा में शामिल होने का प्रस्ताव भी दे दिया।
इस दौरान कुमार विश्वास ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का नाम लिए बगैर उन पर निशाना साधा और अखिलेश की तारीफें कीं। केजरीवाल पर हमला करते हुए कुमार विश्वास ने कहा कि मैं जिसे बसाकर आया था, उन्होंने भगा दिया और दूसरे लोग सोच रहे हैं हमारे पास आ जाए। कुमार ने कहा कि अखिलेश यादव से कहूंगा कि लड़े संघर्ष करें, देश को आपकी जरूरत है। देश में जो चल रहा है वह चिंताजनक है। यहां गुस्से का ताप कम होने की जरूरत है। इस मिट्टी की तासीर ऐसी है कि कभी ज्यादा नफरत सहन नहीं करती।
कवि कुमार विश्वास ने चुटकी भरे अंदाज में कहा कि मैं सभागार में हूं और इसकी चर्चा बाहर बहुत है। मुझसे एक पत्रकार ने पूछा कि आप सपा के कार्यक्रम में, ये अजीब नहीं है। मैंने जवाब दिया कि लोकतंत्र में ऐसा ही होता था, मगर आजकल अलग है। मुलायम सिंह हमारे लिए एक इमोशन हैं। आने वाले समय में चर्चा होगी कि हम उस समय राजनीति देख रहे थे, जब मुलायम सिंह थे।
कुमार विश्वास ने मुलायम सिंह यादव की तारीफ की। कहा कि नेताजी जब मंच पर आए तो उन्हें ये चिंता नहीं थी मंच पर कौन है? मंच के नीचे जनता का अभिवादन किया। इशारों में कुमार विश्वास ने कांग्रेस-भाजपा पर तंज कसा। कहा कि कवियों को सुनना सीखिए, जिन्होंने नहीं सुना वो आज कुछ सुनाने लायक नहीं है। ये कांग्रेस के लोग मान अपमान नहीं भूलते। यहां हम और प्रमोदजी ही ब्राह्मण हैं। एक दूसरे को सुना लेते हैं। उन्होंने कहा कि रामगोपाल आज भी युवा हैं। समाजवादी परिवार की विशेषता है कि हिंदी के साहित्य के लिए यह परिवार खड़ा रहा।

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