
” यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवता:” मनुस्मृति कि उक्त सूक्ति को निजी जीवन में आत्मसात करने वाले , बेटी को बोझ नहीं सौभाग्य बताने वाले और नारी अबला नहीं सबला है , इस ओर प्रयास करने वाले जननायक शिवराज सिंह चौहान जी का जन्म मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के ग्राम जैत में स्वर्गीय प्रेम सिंह चौहान जी और श्रीमती सुंदर बाई चौहान जी के आंगन में 5 मार्च 1959 को हुआ । बचपन से ही विलक्षण प्रतिभा के धनी शिवराज सिंह चौहान जी की रुचि न केवल शिक्षा में थी बल्कि समाज सेवा के अंकुर छात्र जीवन में ही प्रस्फुटित होने लगे थे, तभी शिवराज सिंह चौहान जी गांव में मजदूरों की मजदूरी को लेकर परिवार से अलग आंदोलन करने लगते हैं और छात्र जीवन में आपातकाल के दौरान तत्कालीन सरकार के खिलाफ मोर्चा संभाल लेते हैं और नतीजा जेल भी जाना पड़ा । अल्प उनके भाग्य में नहीं तभी तो शिक्षा की बात होती है तो स्नाकोत्तर ( दर्शनशास्त्र ) में स्वर्ण पदक प्राप्त कर लिया और बात राजनीति की चली तो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से शुरू होकर यात्रा युवा मोर्चा के रास्ते लोकसभा होते हुए लगातार चार बार से मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री की कमान संभाले हुए हैं और केवल मुख्यमंत्री ही नहीं लेकिन मध्यप्रदेश की करोड़ों जनता को भगवान कहने वाले शिवराज सिंह चौहान जी मध्य प्रदेश रूपी मंदिर में साधना के साथ पुजारी बनकर सेवा कर रहे हैं ।
शिवराज सिंह चौहान जी के परिवार में पत्नी साधना सिंह चौहान जी के अलावा पुत्र कार्तिकेय सिंह चौहान और कुणाल सिंह चौहान है, पुत्री ना होने का मलाल शायद उन्हें इसलिए भी ना हो क्योंकि न केवल उन्होंने सात बेटियों को गोद लेकर उनका लालन-पालन किया बल्कि उन बेसहारा बेटियों को माता-पिता की कमी का एहसास नहीं होने दिया ,इसके लिए एक पिता के रूप में पूरी जिम्मेदारी का निर्वहन भी किया । हाल ही में विदिशा में अपनी तीन गोद ली बेटियों का विवाह सभी रस्मों को निभाते हुए बड़ी धूमधाम से किया और इस नेक कार्य में पत्नी साधना सिंह चौहान जी सम्बल बनकर साथ खड़ी रही हैं । जैसे ही 2005 में शिवराज सिंह चौहान जी ने सूबे के मुखिया की शपथ ग्रहण की यकीन मानिए प्रदेश की महिलाओं को मुख्यमंत्री के रूप में अपना एक भाई मिला जो उनकी रक्षा की जिम्मेदारी अपने कंधों पर लेने वाला था, जनता को भले ही मुख्यमंत्री मिला हो , राजनीति को एक कुशल वक्ता जो अटल जैसे पुरोधा का अनुसरण करता हो, मिला हो लेकिन इस प्रदेश के बेटे बेटियों को मामा मिल गया और खुद मुख्यमंत्री स्वयं को “मामा” कहलवाना भी पसंद करते हैं । बेटी के विवाह को लेकर माता-पिता बेटियों को बोझ न समझें, विवाह के खर्च के बोझ तले दबकर दर्द महसूस ना करें इसके लिए शिवराज सिंह चौहान जी ने “मुख्यमंत्री विवाह / निकाह योजना” प्रारंभ की और प्रदेश में गरीब बेटियों के हाथ पीले करने की जिम्मेदारी अब शिवराज सिंह चौहान की थी , बेटियों को लाडली बनाने के लिए “लाड़ली लक्ष्मी योजना” से केवल कहने को लाड़ली नहीं बनाया बल्कि बेटी के लालन-पालन से लेकर उसकी शिक्षा-दीक्षा की जिम्मेदारी सरकार की होगी , ऐसी योजना बनाकर खुद शिवराज सिंह चौहान जन – जन के लाडले बन गए । गरीब , मजदूर बहनों की चिंता उधर मोदी जी ने की कि कैसे चूल्हे के धुंए में बहने बीमारी से घिरती जा रही हैं तो वह “उज्ज्वला योजना” के माध्यम से उन बहनों का जीवन सुखमय और स्वस्थ बनाने का काम माननीय प्रधानमंत्री जी ने किया, इधर शिवराज सिंह चौहान जी ने “स्त्री प्रसूति सहायता” राशि के माध्यम से जच्चा और बच्चा के स्वास्थ्य का ख्याल रखा इस कार्य में “प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना” भी कारगर साबित हुई है और शिवराज सरकार बधाई की पात्र है कि पूरे देश में मध्य प्रदेश इस योजना के क्रियान्वयन में लगातार तीन बार से प्रथम रहा है ।
एक कार्यकर्ता के रूप में शिवराज सिंह चौहान जी ने सदैव ही वैचारिक संस्कारों को बढ़ा है, सामाजिक न्याय और समरसता पर ध्यान दिया है , नारी सशक्तिकरण को लेकर न केवल नारों और योजना बना कर फाइलों तक सीमित रहे हैं वरन योजना को जनभागीदारी से जन आंदोलन बनाने का कार्य सदैव शिवराज सिंह चौहान जी ने किया है । ऐसा नहीं कि केवल शासकीय योजनाओं से महिलाओं को सशक्त बनाने की कोशिश मात्र की हो, बल्कि नौकरियों में बराबर का हिस्सा प्रदान कर सशक्त बनाने का कार्य शिवराज सिंह चौहान जी ने किया है, इसके अलावा नगरीय निकाय और पंचायत में महिलाओं के लिए सुनिश्चित प्रतिनिधित्व कोटा महिलाओं के लिए देकर उनकी सहभागिता को बढ़ाने की कोशिश की है । मध्यप्रदेश को बीमारू राज्य से विकासशील राज्य बनाने के लिए एक आंदोलन का रूप प्रदान किया गया है । हर एक क्षेत्र में शिवराज सरकार ने अभूतपूर्व और अविस्मरणीय लक्ष्य हासिल किया है , ऐसा नहीं कि केवल महिला सशक्तिकरण की ओर है शिवराज सरकार का ध्यान हो, कैसे पक्ष में होकर विपक्ष को साथ लेकर चलना है , राजनीति की रपटीली राह पर चलकर राजनीतिक गलियारों के कयासों को खोखला साबित करने की कला सामान्य से दिखने वाले सरल , सहज और सुगम्य शिवराज सिंह चौहान को बखूबी आता है । कभी – कभी अपनों के ही द्वारा बनाए गए राजनीति चक्र को तोड़ने की कला राजनीति के माहिर खिलाड़ी इस अभिमन्यु ( शिवराज )ने सीख ली है, विपक्षियों द्वारा भ्रष्टाचार के आरोप शिवराज सिंह चौहान पर लगाए जाते हैं तो काजल की कोठी से बेदाग चेहरा जब शासन की संस्कृति को अंतर्निहित कर सादगी भरे अंदाज से बाहर निकल आते हैं तो विपक्ष भी उनका कायल हो जाता है, कुछ तो विपक्ष में होकर भी उनके इतने मुरीद हैं कि कहते हैं आदमी तो ठीक है लेकिन गलत राजनीतिक दल में है, अब तो शिवराज को मध्यप्रदेश भा गया है और मध्य प्रदेश की जनता को उनका “मामा” । नायक के अंदाज से कार्यशैली को देखते हुए सिर्फ इतना ही कहा जा सकता है कि “ना भूतो ना भविष्यति ।”
आपके उज्जवल भविष्य की मंगलकामनाएं !
लेखिका
डॉ. सलोनी सिंह धाकड़
भाजपा नेत्री विधानसभा क्षेत्र पोहरी-24
ट्रस्टी- स्व. देवराज स्मृति सेवा संस्थान

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