मंत्रियों को 2023 की चिंता : ये जनसेवा का तरीका या फिर…..?

सूबे में भले ही 2023 के चुनावी समर में अभी वक़्त है लेकिन राजनैतिक दलों में छटपटाहट दिख रही है, सत्ताधारी दल विभिन्न कार्यक्रमों से विभिन्न वर्गों को साधने के नायाब तरीके अपना रहा है तो विपक्ष अभी भी कुम्भकर्ण नींद में है और एक दूसरे की टाँग खींचने में व्यस्त है । विपक्ष के निष्क्रिय होने के बाद भी पक्ष में सत्ता वापिसी की चिंता साफ तौर पर देखी जा रही है । देश प्रदेश के विभिन्न हर रोज शाम को अपने चैनलों पर बिठाकर 2023 के गुणा भाग दिखा रहे हैं ।
इतर इन सबके कुछ वर्तमान विधायक और मंत्री हैं जो अपना भविष्य भाँप चुके हैं तभी तो दिन प्रतिदिन जनता के बीच नए नए प्रयोग कर रहे हैं । सिंधियाई नेताओं को खेमे में लेकर भले ही कमल दल ने सत्ता में वापिसी की लेकिन यही सिंधियाई नेता अब 2023 के समीकरण बिगाड़ रहे हैं, इतना ही नहीं खुद महाराज की सक्रियता मामा से लेकर मुन्ना भैया , नारू दादा और इंदौर वाले भैया जी के गले की वो फांस बन गए हैं जिसे न तो वे उगल पा रहे हैं और न ही निगल पा रहे हैं । कमल दल में उपेक्षा झेल रहे नेताओं को अपनी चुनावी वैतरणी पार करने के लिए महाराज ही एकमात्र आशा की किरण दिखाई दे रहे हैं ।
सिंधियाई विधायक और मंन्त्री हर समय साबित करना चाहते हैं कि अपने तो बस महाराज , ग्वालियर के अजब और गजब मंन्त्री जी हैं जो कभी नाले में उतरकर सफाई करते हैं तो कभी सार्वजनिक शौचालय धुलते देखे जाते हैं, सड़क पर परेशान होते बच्चे को उसकी भैंस घर तक पहुंचाने में मदद करते हैं तो कभी बुजुर्ग को ठेला धकेलने में मदद करते हैं । कभी अपनी ही सरकार की ब्यूरोक्रेसी से परेशान होकर नंगे पैर चलने का संकल्प ले लेते हैं तो कभी रातभर अस्पताल में बैठकर मरीजों के पैर दबाने लगते हैं , और तो और जब प्रशासन माननीय मंत्री जी इच्छा के विपरीत गरीबों की दुकानें तोड़ देता है तो मंन्त्री जी स्तीफा देने तक कि बात सार्वजनिक तौर पर बोल देते हैं ।
ऐसे ही कट्टर सिंधियाई पहली बार के विधायक और मामा के राज्यमंत्री भी ऊर्जा मंत्री से सीखकर भरपूर ऊर्जावान दिखाई दे रहे हैं, वे भी आजकल इनकी ही राह पर चल रहे हैं, कभी सड़क किनारे लोहपीठा समाज के घन को उठाकर लोहा पीटने लगते हैं तो कभी गाँव में रात्रि प्रवास के दौरान ग्रामीणों के साथ भजन संध्या पर थिरकते नजर आ रहे हैं । अब सायरन लगी गाड़ी से नीचे उतर कर बुलेट राजा बनने से भी परहेज नहीं कर रहे हैं, लोग सोशल मीडिया पर चुटकी लेते देखे जा रहे हैं कि आजकल रातभर गांव में रुककर जिन समस्याओं को सुना जा रहा है उनमें से कितनी समस्याओं का समाधान हो रहा है । राजनीति की समझ रखने वाले तो ये भी कह रहे हैं कि 2023 में अपनी राजनीतिक जमीन खिसकने की आहट से वक़्त की नजाकत को समझ कर वोट बैंक की खातिर ये सब नौटंकी से अधिक कुव्ह नहीं है । विकास के नाम पर प्रतिदिन भूमिपूजन का नारियल चटका रहे हैं लेकिन बीते कार्यकाल में ऐसी कोई बड़ी उपलब्धि हासिल नहीं जिसके नाम पर वोट भुनाया जा सके ।

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