पोहरी में कांग्रेस अपनों से अधिक पैराशूट कैंडिडेट के भरोसे

शिवपुरी : जिले की पोहरी विधानसभा सीट उन सीटों में शामिल है जिन्होंने विगत 2020 में पंद्रह साल बाद बनी कांग्रेस की सरकार को अपनें राजनीतिक आका के कहने पर गिरा दिया था और बदले में भारतीय जनता पार्टी की सरकार में मंत्री पद । हालांकि पाला बदलने वाले माननीय खुद 2018 में पहली बार विधायक बने थे लेकिन महाराज का हुकुम शिरोधार्य था , कहते हैं कि जिनके भाग्य प्रबल होते हैं वही राजा होता है और ऐसा ही कुछ पोहरी के माननीय पर सत्य भी साबित होता है, माननीय पाला बदलने के बाद न केवल बढ़ते मार्जिन से अपनी सीट बचाने में कामयाब हो पाए बल्कि राज्य सरकार में मंत्री पद भी संभाल रहे हैं।
2023 में एक बार फिर आम विधानसभा चुनाव है और पोहरी सीट एक बार फिर चर्चा में है क्योंकि यहां भारतीय जनता पार्टी में दावेदारों में टिकिट के लिए प्रतिद्वंदता है तो वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस अपने मूल नेताओं के अलावा पैराशूट कैंडिडेट पर अधिक भरोसा जताने के मूड में हैं । अभी हाल ही में पाला बदलकर हाथी से उतरकर कांग्रेस से हाथ मिलाने वाले नेताजी ने बीते दो चुनावों में हाथी पर सवार होकर पोहरी के राजनीतिक गलियारों में खूब धूल उड़ाई थी और अब चर्चा है कि कांग्रेस अपने तमाम मूल नेताओं जिनमे एक पूर्व जनपद अध्यक्ष का नाम भी शामिल है को दरकिनार कर हाथी से उतरकर साथी बने नेताजी के भरोसे अपनी जीत की वैतरणी पार करने की कोशिश में है हालांकि चर्चा तो इस बात की है कि कमल दल के एक पूर्व विधायक जो टिकिट के लिए प्रयासरत हैं यदि टिकिट न मिला तो कांग्रेस के हाथ मजबूत कर सकते हैं हालांकि जैसी उनकी विचारधारा है उससे तो यह नामुकिन सा लगता है लेकिन राजनीति में संभावनाएं कभी खत्म नहीं होती है, फिलहाल तो कयासों और चर्चा का दौर है वक्त आने पर सब तस्वीर साफ होगी ।

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