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नरसिम्हा राव सरकार के मंत्री थे फूलन देवी की जान के दुश्मन! क्यों धर्म बदलना चाहती थीं दस्यु सुंदरी?

साल था 1992। जून का गरम महीना। दस्यु सुंदरी कही जाने वालीं फूलन देवी उन दिनों ग्वालियर सेंट्रल जेल में सजा काट रही थीं। रॉय मोक्स्हम ने कुछ ही दिन पहले एक अखबार में फूलन की कहानी पढ़ी थी। फूलन ने अपने बलात्कार का बदला लेने के लिए अगड़ी जाति के 22 लोगों का कत्ल कर 1983 में आत्मसमर्पण किया था। सरकार से डील हुई थी कि आठ साल से ज्यादा जेल में नहीं रखा जाएगा। लेकिन, ऐसा हुआ नहीं। मोक्स्हम ने जेल में फूलन के नाम एक चिट्ठी भेज दी। इसमें उनकी मदद का प्रस्ताव था।फूलन उन दिनों चुनाव लड़ रही थीं, जो वह हार गईं। मोक्स्हम को अखबारों से इस हार का पता चला। फूलन से उनकी सुहानूभूति और बढ़ गई। तभी फूलन देवी पर लिखी माला सेन की किताब (India’s Bandit Queen – the True Story of
- Phoolan Devi)उनके हाथ लग गई। वह पूरी रात किताब पढ़ते रहे। किताब में फूलन की गरीबी, जुल्म और अपराध की दुनिया में आने की कहानी पढ़ कर उनकी हमदर्दी और बढ़ गई।

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