ग्वालियर की अनदेखी पर उठे सवाल, मेडिकल यूनिवर्सिटी को लेकर बढ़ा असंतोष

ग्वालियर। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा उज्जैन में नई धन्वंतरि हेल्थ यूनिवर्सिटी स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ाए जाने के बाद ग्वालियर-चंबल अंचल में मेडिकल यूनिवर्सिटी की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। सरकार ने विधानसभा में संबंधित विधेयक भी प्रस्तुत किया है।
क्षेत्र के शिक्षाविदों, चिकित्सकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि ग्वालियर चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में प्रदेश का सबसे मजबूत केंद्र रहा है। गजरा राजा मेडिकल कॉलेज (GRMC) की स्थापना वर्ष 1946 में हुई थी और इसे मध्य प्रदेश के सबसे पुराने मेडिकल कॉलेजों में गिना जाता है। यहां वर्षों से हजारों डॉक्टर तैयार हुए हैं, जो देश-विदेश में सेवाएं दे रहे हैं।
मांग करने वालों का कहना है कि जब प्रदेश में नई मेडिकल यूनिवर्सिटी स्थापित की जा रही है, तब ग्वालियर जैसे ऐतिहासिक और प्रमुख चिकित्सा केंद्र को प्राथमिकता मिलनी चाहिए थी। उनका तर्क है कि ग्वालियर में मेडिकल यूनिवर्सिटी बनने से ग्वालियर-चंबल संभाग के साथ-साथ शिवपुरी, मुरैना, भिंड, दतिया, गुना, अशोकनगर और आसपास के जिलों के मेडिकल कॉलेजों तथा विद्यार्थियों को सीधा लाभ मिलता।
लोगों का कहना है कि ग्वालियर लंबे समय से उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख केंद्र रहा है, लेकिन कई महत्वपूर्ण संस्थान अन्य शहरों को मिलने से क्षेत्र में उपेक्षा की भावना बढ़ी है। उनका मानना है कि मेडिकल यूनिवर्सिटी जैसी बड़ी संस्था से ग्वालियर में चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान, स्वास्थ्य सुविधाओं और रोजगार के नए अवसर विकसित हो सकते थे।
हालांकि, सरकार का कहना है कि नई धन्वंतरि हेल्थ यूनिवर्सिटी का उद्देश्य प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा का विस्तार और बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था सुनिश्चित करना है। सरकार के अनुसार, यह निर्णय क्षेत्रीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर लिया गया
है।

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