व्यक्तित्व : समाजसेवा और सलोनी सिंह एक दूसरे के पर्याय हैं

समाजसेवा एक ऐसा शब्द है जो सुनने में अच्छा लगता है और हर कोई इसका प्रयोग कर समाजसेवी कहलाना पसंद करता है लेकिन हर किसी के नसीब में यह सम्भव नहीं है।इसको करने के लिए दिल बड़ा रखना पड़ता है। स्वयं की मेहनत की कमाई दूसरों के लिए ख़र्च करनी पड़ती है और अपना अमूल्य समय इस देश के उस वर्ग के बीच बिताना पड़ता है जहाँ अभी सरकार का सरोकार नहीं है। बावजूद इसके समाज के बीच ताने सुनने पड़ते हैं कि यह सब निज स्वार्थ के लिए किया जा रहा है।इन सबको नजरअंदाज कर अपने इस काम मे लगे रहना थोड़ा मुश्किल सा होता है लेकिन सलोनी सिंह ये सब कर रहीं हैं ।
डॉ. सलोनी सिंह धाकड़ एक ऐसा नाम है जिसे समाजसेवा का दूसरा नाम माना जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी । जब किसी की जुबान पर समाजसेवा शब्द आता है तो सलोनी सिंह का ज़िक्र न हो ये असंभव है और किसी चौपाल पर सलोनी सिंह के नाम पर चर्चा हो तो समाजसेवा की चर्चा न हो ये नामुमकिन सा लगता है।
जी हाँ, हम बात कर रहे हैं स्व. देवराज सिंह किरार स्मृति सेवा संस्थान की सदस्य श्रीमती डॉ सलोनी सिंह धाकड़ की । डॉ धाकड़ एक ऐसा नाम है जिसने कम समय में अपने कामों की बदौलत बड़ी शौहरत हासिल की है । समाजशास्त्र में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त सलोनी सिंह किसी परिचय की मोहताज नहीं है ।विगत दस साल में सलोनी सिंह ने पोहरी विधानसभा के हर उस पिछड़े इलाकों में पहुंचकर निःशुल्क स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया है जहाँ अभी स्वास्थ्य सुविधाएं खुद ही बीमार पड़ी हुई हैं।इसके अलावा हर समाज के सामूहिक विवाह सम्मेलन में पहुँच कर नव युगल दम्पति को आशीर्वाद स्वरूप उपहार देना,तो गरीब कन्याओं का निःशुल्क विवाह कराना सलोनी सिंह की फितरत बन गई है ।
यही एक बजह रही है कि अल्प समय में सलोनी सिंह की सक्रियता ने समाजसेवा के साथ साथ राजनीतिक गलियारों में भी चहलकदमी मचा दी है ।जहाँ जनता उनकी उम्मीदवारी का बेसब्री से इंतजार कर रही हैं वहीं राजनीति दल भी समय समय पर उनके नाम पर विचार करते नज़र आये हैं ।आने वाले समय में सलोनी सिंह के लिए राजनीति समाज सेवा का माध्यम बनेगी इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। आज के समय में सलोनी सिंह एक ऐसा नाम है जिसे शुभ चिंतक पूरी शिद्दत से स्वीकार करते हैं तो विरोधी खेमा उनके अस्तित्व के होने से इंकार नहीं कर सकता है ।

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