ग्वालियर आईजी को हटाने के सरकार को थी मौके की तलाश

बीते रोज हुई पुलिस और शिकारियों के बीच की मुठभेड़ में मध्यप्रदेश पुलिस के तीन जाबांज लोग शहीद हो गए । बाद में पुलिस की कार्यवाही में चार लोगों को मार गिराया तो वहीं सरकार ने अपराधियों के घरों पर बुलडोजर चलाकर धराशायी कर दिया और पुलिस प्रशासन की लापरवाही के चलते ग्वालियर रेंज आईजी अनिल कुमार शर्मा को हटा दिया है ।
ग्वालियर आईजी को हटाकर भले ही सरकार वाहवाही लूटने का प्रयास कर रही हो लेकिन शर्मा को हटाना उक्त घटना नहीं बल्कि राजनीतिक घटना है । दरअसल पुलिस और शिकारियों के बीच हुई मुठभेड़ में ग्वालियर आईजी अनिल कुमार शर्मा को हटाने के बाद सियासी चर्चा तेज हो गई है । ग्वालियर IG के पद पर 1997 बैच के डी श्रीनिवास वर्मा की पोस्टिंग जनवरी 2022 में की गई थी वे गृह सचिव थे ,ऑर्डर के बाद रिलीव भी हो गए लेकिन उन्हें जॉइनिंग से पहले ही वापस बुला लिया गया था । और यह सब राजनीतिक दबाव में हुआ, इसके तुरंत बाद 2002 बैच के अनिल कुमार शर्मा की पोस्टिंग हो गई । शर्मा को केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का करीबी माना जाता है । और उनके दखल के कारण ही उस समय डी श्रीनिवास की जोइनिंग नहीं हो पाई थी क्योंकि सिंधिया शर्मा को लाना चाहते थे और लाये भी और तभी से लगतार सरकार शर्मा को हटाने का मौका तलाश रही थी । माना जा रहा है कि इस बदलाव की स्क्रिप्ट पहले से ही तैयार थी इंतजार था तो सिर्फ एक मौके का, जो आरोन की घटना ने दे दिया । चर्चा है कि घटना की सूचना आई जी शर्मा को करीब सुबह 6:00 बजे दे दी गई थी लेकिन शर्मा ने घटना को गंभीरता से नहीं लिया और वे दोपहर 1:00 बजे घटनास्थल पर पहुंचे थे और उनकी इसी लापरवाही को आधार मानकर मौके पर चौका मार कर सिंधिया के कर्तव्यनिष्ठ और करीबी IG अनिल शर्मा को हटा दिया ।

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