जनकल्याणकारी योजनाओं को पलीता लगाते अधिकारी-कर्मचारी

राज्य विशेष : केंद्र की मोदी सरकार और मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार भले ही गरीब,किसानों और पिछड़े वर्ग के लिए कई योजनाओं को लागू कर सबका साथ सबका विकास करने की बात कर रहे हों लेकिन हकीकत में जमीनी स्तर पर इन जनकल्याणकारी योजनाओं को पलीता लगाने का काम शिवराज सरकार के ब्यूरोक्रेसी कर रही है । विभिन्न विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों के द्वारा लगातार सरकार की योजनाओं को लेकर न केवल आम आदमी को गुमराह किया जा रहा है लेकिन इनका लाभ दिलाने में आनाकानी ब्यूरोक्रेसी द्वारा किया जा रहा है ।
प्रधानमंत्री ने पीएम किसान सम्मान निधि और मान धन योजना के माध्यम से किसानों खेती की लागत में सहयोग करने के लिए करीब डेढ़ हजार करोड़ रुपए के बजट को किसानों के खाते में भेजने की बात कही जा रही हो लेकिन जमीनी स्तर पर पटवारियों के द्वारा किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि के नाम पर परेशान किया जा रहा है और इतना ही मानधन जैसी योजना से किसान आज भी अनिभिज्ञ हैं । कई जगह देखने मे आता है कि नामांतरण के नाम पर पटवारियों की ओर से चौथ वसूली जारी है यही कारण है कि आए दिन लोकायुक्त के शिकंजे में पटवारी फंसते जा रहे हैं । शिवराज सरकार भले ही मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के नाम पर किसान के कल्याण की बात करती हो लेकिन वास्तविक रूप में कर्मचारियों के द्वारा किसानों का शोषण जारी है ।
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना कोरोना काल में आम आदमी के लिए संजीवनी बूटी साबित हो ,इसी उद्देश्य के साथ बनाई गई थी लेकिन वास्तव में इस योजना से कल्याण किसी का हुआ है तो अधिकारियों और कर्मचारियों का हुआ है, तभी तो लगातार कोरोना काल खत्म होने के बाद भी इस योजना को लगातार बढ़ाया जा रहा है । अधिकतर देखने में आया है कि सेल्समैन द्वारा पीडीएस और पीएमजीकेबाय योजना में हितग्राहियों को केवल पीडीएस का 1 रुपये किलो वाला राशन फ्री में दिया गया और प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के राशन में अधिकारियों ने भ्रष्टाचार का ऐसा घुन लगाया कि आम आदमी तक इसकी बू भी नहीं पहुंची और सरकार 80 करोड़ हितग्राहियों को मुफ्त राशन देने का ढिंढोरा पीटकर 2023 और 2024 के लिए वोट बैंक तैयार करने की जुगत में है ।
आम आदमी चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रहा है, इस तरह के मामलों की शिकायत आखिर करे तो कहाँ करे । मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भले ही भ्रष्टाचारियों को झेल में डालने की बात पर चिल्ला कर बोलते हैं लेकिन उनकी ही सीएम हेल्पलाइन आम आदमी के लिए हेल्पलेस साबित होती है, आमजन द्वारा दर्ज शिकायत को अधिकारियों द्वारा बिना कार्यवाही किए ही बंद कर दिया जाता है ।

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