त्रिकोणीय मुकाबले में फंसे कैलाश , जनाधार पर संशय

पोहरी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के प्रत्याशी कैलाश कुशवाह चुनाव मैदान में है तो वहीं भारतीय जनता पार्टी से मौजूदा विधायक सुरेश धाकड़ और बहुजन समाज पार्टी से पूर्व जनपद अध्यक्ष प्रद्युम्न वर्मा चुनावी मैदान में है । सुरेश धाकड़ तीसरी बार चुनाव मैदान में है तो वहीं कैलाश कुशवाह का मुकाबला भी तीसरी बार सुरेश धाकड़ से हो रहा है, इससे पूर्व में दो बार बहुजन समाज पार्टी से चुनाव लड़ चुके हैं । प्रद्युम्न वर्मा पहली बार बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर अपनी किस्मत आजमा रहे हैं । कुल मिलाकर मुख्यतः तीनों चेहरे ही मैदान में मुकाबले में है जिन्हें क्षेत्र की जनता भलीभांति पहचानती है । इनमें से दो प्रत्याशियों को बतौर प्रत्याशी जनता पहले भी परख चुकी है और 2018 और 2020 के चुनाव में मतदाताओं ने कैलाश कुशवाह को वोट देते हुए दूसरे नंबर पर रखा था, 2018 में कैलाश कुशवाह और कांग्रेस से जीत हासिल करने वाले सुरेश धाकड़ के बीच अंतर कम था लेकिन 2020 में जीत का अंतर काफी ज्यादा हो गया था , कैलाश को दो बार पहले भी क्षेत्र की जनता नकार चुकी है । अब इस बार जनता कैलाश कुशवाह को मौका देगी या नहीं यह तो आने वाला समय बताएगा ।
जिस ऊर्जा और ताकत के साथ कैलाश कुशवाह चुनावी कैंपेन शुरू करते हैं वह आखरी तक जाते-जाते कमजोर पड़ जाता है इसीलिए राजनीतिक गलियारों में चर्चा बनी हुई है कि क्या कैलाश कुशवाह इस बार जनाधार प्राप्त कर पाएंगे या नहीं यह तो आने वाले समय में ही पता चल पाएगा । कैलाश के ढीले पड़ते कैंपेन और भारतीय जनता पार्टी की नाजुक स्थिति के चलते बहुजन समाज पार्टी मजबूत होती जा रही है । भाजपा के लिए वहां की स्थानीय मीडिया में उनके कार्य पद्धति को लेकर भारतीय असंतोष देखा जा रहा है तो कांग्रेस प्रत्याशी कैलाश कुशवाह के साथ पार्टी कार्यकर्ता कम ही दिखाई दे रहे हैं । पोहरी विधानसभा क्षेत्र की चुनावी स्थिति में कौन किस आगे है यह बताना भले ही जानकारी के लिए कठिन है । कैलाश ने जब से कांग्रेस का हाथ थामा है तब से लगातार क्षेत्र में सक्रिय थे और अपनी जमीन मजबूत करने में लगे हुए थे लेकिन जातिगत समीकरण में कैलाश का जनाधार उलझता हुआ दिखाई दे रहा है ।

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