लाड़ली के बाद अब लाड़ले हुए किसान, मोहन यादव का खेती को फायदे में लाने का प्लान
प्रदेश विधानसभा चुनाव 2028 के लिए मोहन यादव बना रहे रणनीति, महिलाओं के बाद अब किसानों पर फोकस की तैयारी

भोपाल: विधानसभा चुनाव 2028 के लिए अभी पूरे ढाई साल का समय बाकी है, लेकिन मोहन सरकार ने लाड़ली बहना के जरिए महिला वोटर के बाद अब किसानों पर फोकस शिफ्ट किया है. इस वर्ष को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मना रही मोहन सरकार अब पूरे प्रदेश में खेती में हुए नए प्रयोग को किसानों तक पहुंचाने कृषि नवाचार संवाद शुरू करेगी. इसमें खेती की मार्डन टेक्नीक से लेकर नए प्रयोग और कैसे इसे एक उद्योग में तब्दील किया जाए ये टिप्स दिए जाएंगे. संभाग से लेकर जिले तक ये संवाद होंगे.
कौन सी फसलें हैं जो खेती को लाभ का धंधा बनाएंगी
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य के कई विश्वविद्यालयों में कृषि संकाय की पढ़ाई प्रारंभ की गई है. युवा कृषि शिक्षा प्राप्त कर नई संभावनाओं के द्वार खोलें और कृषि की जड़ों से जुड़े रहते हुए नए प्रयोग करें. उन्होंने कहा कि किसान पॉलीहाउस, वेयरहाउस, फूड प्रोसेसिंग और अन्य कृषि आधारित उद्यम स्थापित कर अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं. इसके अलावा कम जमीन में ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए हॉर्टिकल्चर से जुड़ी फसलों के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है. पॉलीहाउस में गुलाब सहित विभिन्न फूलों की खेती, मशरूम फार्मिंग, पर्ल फार्मिंग और मधुमक्खी पालन जैसे काम कम लागत में किए जा सकते हैं जो ज्यादा मुनाफे के हैं.
चुनाव से पहले किसान पर क्यों फोकस कर रही है मोहन सरकार
मध्य प्रदेश में अगर सबसे बड़ा वोट बैंक कोई है तो वो किसानों का ही है. प्रदेश में रजिस्टर्ड किसानों की संख्या एक करोड़ 11 लाख है. एक तरह से देखा जाए तो प्रदेश की 70 फीसदी आबादी की जीविका खेती किसानी पर ही निर्भर है. इस नजरिए से ये आसानी से समझा जा सकता है कि किसान और गांव में रहने वाला दीगर वोटर ही मध्य प्रदेश में गेम चेंजर है.

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