वैज्ञानिकों ने खोला AI के ‘ब्लैक बॉक्स’ का राज, रिज़र्वॉयर कंप्यूटिंग तकनीक पर IIT इंदौर की रिसर्च

इंदौर: रिज़र्वॉयर कंप्यूटिंग तकनीक केवल डेटा में मौजूद पैटर्न को ही याद नहीं करती, बल्कि डेटा की जटिल प्रणालियों में अचानक होने वाले बदलावों के पीछे छिपे भौतिक नियमों को भी सीख सकती है. आईआईटी इंदौर में ऐसे ही एक महत्वपूर्ण रिसर्च से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की कार्यप्रणाली को समझना संभव हो सका है. कंप्यूटर की रिजर्वायर तकनीक के जरिए आर्टिफिशियल इटेलिजेंस ब्लैक बॉक्स के उन भौतिक नियमों को भी फॉलो करती है जो डाटा प्रणाली का अहम हिस्सा होती है.
आईआईटी इंदौर की प्रोफेसर सारिका जालान की टीम की रिसर्च
आईआईटी इंदौर की प्रोफेसर सारिका जालान की टीम ने यह महत्वपूर्ण रिसर्च किया है जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की कार्यप्रणाली को समझने की दिशा में अहम उपलब्धि है. वैज्ञानिकों के अनुसार कई वास्तविक प्रणालियां लंबे समय तक अनिश्चित व्यवहार करती हैं और फिर अचानक एक अलग अवस्था में पहुंच जाती हैं. इस निर्णायक स्थिति को ‘क्राइसिस’ या ‘टिपिंग प्वाइंट’ कहा जाता है.एआई मॉडल ऐसे बदलावों से पहले मिलने वाले संकेतों की पहचान करने में सक्षम पाए गए हैं, लेकिन इसके पीछे की प्रक्रिया अब तक स्पष्ट नहीं थी. अपने तरह के इस महत्वपूर्ण रिसर्च के लिए आईआईटी इंदौर की टीम ने भौतिकी आधारित विश्लेषण उपकरणों के जरिए एआई की आंतरिक कार्यप्रणाली का अध्ययन किया. इसके परिणामों की वास्तविक भौतिक प्रणालियों से तुलना की गई. शोध में पाया गया कि एआई का आंतरिक व्यवहार वास्तविक प्रणालियों से बेहद सटीक रूप से मेल खाता है और संकट से पहले उभरने वाली सूक्ष्म सांख्यिकीय विशेषताओं को भी पकड़ता है.

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